
राजीव दवे
प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति यूनानी के प्रदेश में 468 चिकित्सालय हैं, लेकिन सरकार ने इस पद्धति को हाशिए पर धकेल रखा है। यूनानी चिकित्सालयों में हर मरीज के लिए महज दो रुपए की दवा उपलब्ध करवाई जाती है। यदि चिकित्सालय में एक साल में 10 हजार मरीज आते हैं तो महज 20 हजार रुपए की दवा दी जाती है।
प्रदेश के अधिकांश चिकित्सालय में काफी समय से दवा ही नहीं है, जिसे आने में अभी करीब दो माह और लग सकते हैं। इस पद्धति में सरकारी स्तर पर करीब 100 तरह की दवा चिकित्सालय में आती है, जिसमें 20-25 तरह की दवा अजमेर की रसायनशाला में बनाई जाती है। इसके अलावा इंडियन मेडिसिन फार्मास्यूटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आइएमपीसीएल) से करीब 50 तरह की दवा क्रय की जाती है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पाली शहर के बांगड़ अस्पताल के आयुष भवन में संचालित यूनानी डिस्पेंसरी ढाई साल से बंद है। यह अस्पताल 30 जून 2022 से बंद है। ऐसी ही हालत प्रदेश में अन्य कई जिलों में बनी डिस्पेंसरी की है।
यूनानी दवाओं के लिए प्रदेश में एक साथ बजट आता है। चिकित्सालयों के लिए 2.50 करोड़ की दवा ली जानी है। उसकी प्रक्रिया चल रही है।
डॉ. महमूद अहसन सिद्दीकी, उपनिदेशक, यूनानी चिकित्सा
यूनानी चिकित्सा पद्धति में बजट कम आता है। प्रति मरीज 2 से 2.50 रुपए का बजट मिलता है।
डॉ. मनमोहन खींची, निदेशक, यूनानी चिकित्सा
462 चिकित्सालय है प्रदेश में
495 चिकित्सक के पद हैं प्रदेश में
348 चिकित्सक है कार्यरत
147 पद है चिकित्सकों के रिक्त
348 नर्सिंगकर्मी के स्वीकृत पद
271 नर्सिंगकर्मी कार्यरत प्रदेश में
77 नर्सिंगकर्मी के पद रिक्त
Updated on:
15 Feb 2025 08:23 am
Published on:
15 Feb 2025 08:19 am
बड़ी खबरें
View Allपाली
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
