4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मारवाड़-गोडवाड़ में अंगद के पांव की तरह जमे हैं सियासत के कई खिलाड़ी

www.patrika.com/rajasthan-news    
2 min read
Google source verification
मारवाड़-गोडवाड़ में अंगद के पांव की तरह जमे हैं सियासत के कई खिलाड़ी

मारवाड़-गोडवाड़ में अंगद के पांव की तरह जमे हैं सियासत के कई खिलाड़ी

राजेन्द्रसिंह देणोक

पाली. भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दावा है कि राजस्थान में अंगद के पांव की तरह जमे रहेंगे। उनका इशारा अगले विधानसभा चुनाव के लिए था। शाह का दावा कितना सच होगा ये तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन मारवाड़-गोडवाड़ में (पाली-जालोर-सिरोही) जिले में कई जनप्रनिधि जरूर अंगद के पांव की तरह सालों से सियासत में जमे हुए हैं। पाली व बाली विधायक चार बार तथा रेवदर विधायकलगातार तीन बार जीत कर प्रदेश की पंचायत में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वहीं, जैतारण विधायक सियासत के एेसे योद्धा हैं जिन्होंने अब तक लगातार आठ चुनाव लड़े हैं, जिसमें पांच बार सफलता हासिल की है। तीनों ही जिलों में राजनीति के एेसे कई और खिलाड़ी है जो तीन और दो बार से चुनाव जीत रहे हैं और अगली पारी खेलने के लिए भी जुटे हुए हैं।

ये भी एक संयोग
मारवाड़ गोडवाड़ की राजनीति का एक अजीब संयोग रहा है। दो दशक की राजनीति में लम्बी पारी खेलने वाले ज्यादातर भाजपा के विधायक है। सुमेरपुर से चार बार विधायक रहीं बीना काक एक मात्र कांग्रेस की नेता है जो लगातार टिकी हुई है। वे सुमेरपुर विधानसभा से अब तक लगातार ७ चुनाव लड़ चुकी है, उसमें चार बार जीतने में कामयाब हुई। तीन बार हार का भी सामना करना पड़ा। अब अगले चुनाव में उतरने के लिए भी वह सक्रिय है।

मंझे खिलाड़ी, 8 चुनाव लड़े, 5 जीते
जैतारण विधायक सुरेन्द्र गोयल राजनीति के मंझे खिलाड़ी हैं। उन्होंने वर्ष १९८० में निर्दलीय के तौर पर पहला चुनाव लड़ा था। उसके बाद से वे लगातार भाजपा से प्रत्याशी रहे हैं। वर्ष १९८५ और २००८ में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। जबकि १९९०, १९९३, १९९८, २००३ व २०१३ में उन्होंने जीत दर्ज कराई।
जीत की वजह : जातिगत समीकरण, कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा।

इनकी पकड़ भी कमजोर नहीं
जगसीराम - रेवदर से मौजूदा विधायक। लगातार तीन बार से जीत दर्ज करा रहे।
मदन राठौड़ - सुमेरपुर से विधायक। दो चुनाव लड़े। दोनों बार विजयी।
पूराराम चौधरी - भीनमाल से मौजूदा विधायक। अब तक पांच चुनाव लड़े। तीन चुनाव जीते और दो बार हारे।
केसाराम चौधरी - मारवाड़ जंक्शन से भाजपा के विधायक। तीन बार विधायक चुने गए। २००३ में हार मिली।
संजना आगरी - सोजत (आरक्षित) से लगातार दो बार से विधायक।
ओटाराम देवासी - सिरोही से लगातार दो बार से विधायक।

ये हैं चार बार के ‘योद्धा’

ज्ञानचंद पारख
पाली विधानसभा से लगातार चार चुनाव जीत चुके हैं। भाजपा से चुनाव लडऩे वाले पारख ने १९९८ में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पारी की शुरूआत की थी। उसके बाद वर्ष २००३, २००८ व २०१३ का चुनाव जीता। पारख कांग्रेस के शासन में भी अपनी सीट बरकरार रखने में सफल रहे हैं।
जीत की वजह
सक्रिय, सहज उपलब्ध, चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर काम, आमजन से सीधा जुड़ाव, कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा।


पुष्पेन्द्रसिंह राणावत
तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के उप राष्ट्रपति बनने के बाद रिक्त हुई बाली विधानसभा सीट से राणावत ने वर्ष २००२ में अपना सफर शुरू किया था। उप चुनाव में विजयी हुए। उसके बाद से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। वे अब तक लगातार चार बार से बाली विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
जीत की वजह
सहज, विनम्र, आमजन से सीधा जुड़ाव, आदिवासी इलाके में पकड़, कांग्रेस का स्थायी और मजबूत चेहरा नहीं होना।