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मारवाड़ के व्यवसायी मकाना बने बेंगलूरु के महापौर

कर्नाटक के कारोबारी एम गौतम कुमार मकाना ने बेंगलूरु में महापौर की कुर्सी पर काबिज होकर मारवाड़ का नाम रोशन किया है। पाली जिले के हाजीवास गांव निवासी मकाना के महापौर बनने से प्रवासियों और पाली जिले में खुशी का माहौल है।
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पाली

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Vivek Varma

Oct 04, 2019

pali

मारवाड़ के व्यवसायी मकाना बने बेंगलूरु के महापौर

रायपुर मारवाड़ . कर्नाटक के कारोबारी एम गौतम कुमार मकाना ने बेंगलूरु में महापौर की कुर्सी पर काबिज होकर मारवाड़ का नाम रोशन किया है। पाली जिले के हाजीवास गांव निवासी मकाना के महापौर बनने से प्रवासियों और पाली जिले में खुशी का माहौल है। 48 वर्षीय गौतम कुमार कर्नाटक जैन समाज के संभवत: पहले व् यक्ति है जिन्होंने ये मुकाम हासिल किया है।
मकाना के पिता मदनलाल मकाना करीब 70 साल पहले अपने पिता किशनलाल मकाना के साथ हाजीवास से बेंगलूरु चले गए। गौतम मकाना के तीन भाई बेंगलूरु में व्यवसाय करते हैं।
बेंगलूरु में हुई शिक्षा
मकाना का जन्म बेंगलूरु में ही हुआ। इन्होंने बी कॉम तक पढ़ाई की। स्वयं की अलग पहचान बनाने का जुनून शुरू से ही रहा। एक दशक पहले उन्होंने भाजपा का दामन थामा। राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत हलचुर जोगपाल से पार्षद चुनाव लडक़र की। उन्होंने वार्ड में अपना प्रभाव जमाया और लगातार दूसरी बार पार्षद चुने गए। नौ साल तक पार्षद रहकर इन्होंने महापौर की कुर्सी तक का सफर तय किया।
प्रवासी संघ ने किया गर्मजोशी से स्वागत
कर्नाटक जयमल जैन संघ अध्यक्ष मीठालाल मकाना ने बताया कि गौतम मकाना के महापौर निर्वाचित होने से जैन समाज व समस्त प्रवासी संघ उत्साहित है। गौतम मकाना का कर्नाटक के विविध जैन संगठन व अन्य जाति वर्ग के प्रवासी संगठनों द्वारा मकाना का गर्मजोशी से स्वागत किया।
हाजीवास में भी खुशी का माहौल
मकाना के इस मुकाम की जानकारी पर हाजीवास गांव में भी खुशी का माहौल है। हाजीवास सरपंच श्याम सिंह राठौड़, उप सरपंच पशुपति सिंह राठौड़, श्रवण सिंह राठौड़ सहित गांव के लोगों ने मकाना को फोन पर बधाई दी।
प्रवासी राजस्थानी समाज की उम्मीदें बढ़ी
पूरा राजस्थान समाज आज खुश है। उन्हें लगता है कि उनका कोई अपना बेंगलूरु का महापौर बना है। उनकी मुझसे काफी उम्मीदें हैं। उन्हें ध्यान में रखकर काम करेंगे। कई बार यातायात जाम के कारण समाज के कई कार्यक्रमों में शिरकत नहीं कर पाता हूं। लेकिन, समाज के कार्यक्रमों में शामिल होने की कोशिश होगी। यह एक चुनौती है लेकिन समाज उनकी निसंदेह प्राथमिकता होगी।