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मेहंदी तो ‘शोभा’ के हाथों में ही रचेगी

- ‘जनमत’ : सोजत की मेहंदी तो ‘शोभा’ के हाथों में ही रचेगी- बच्चन परिवार की बहू बॉलीवुड स्टार ऐश्वर्या राय हो या फिर हाल ही में अमरीकी पॉप सिंगर निक जोनस के साथ ही शादी के बंधन में बंधी प्रियंका चौपड़ा, हाथों में तो सोजत की मेहंदी ही रचती है। देश-विदेश में चटख रंग जमाने वाले मेहंदी के उत्पादक क्षेत्र सोजत विधानसभा में भी इन दिनों राजनीति उबाल पर है। मेहंदी नगरी की सुरक्षित सीट पर भाजपा ने इस बार नए चेहरे के रूप में शोभा चौहान को मैदान में उतारा है, तो कांग्रेस ने भी शोभा सोलंकी के रूप में नए चेहरे पर दावं खेला है। खास बात ये है कि इनके नाम भी एक है तो पद भी समान, फर्क इतना है कि चौहान वर्तमान प्रधान है तो सोलंकी पूर्व प्रधान। इसके अलावा कई निर्दलीयों ने भी ताल ठोक रखी है, जो कुछ हद तक जातिगत चुनावी समीकरण को बिगाड़ रहे हैं। अब ये तो ‘जनमत’ ही तय करेगा कि सोजत की मेहंदी किसके हाथों में रचेगी। मुख्य मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के ही बीचनिर्दलीयों से बिगड़ रहा जातिगत समीकरण
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Mehndi will be in the hands of Shobha.

मेहंदी तो ‘शोभा’ के हाथों में ही रचेगी

राजकमल व्यास
सोजत। ‘सिटी ऑफ हिना’ के नाम से ख्यात सोजत विधानसभा क्षेत्र के सोजत से लेकर गांव-गलियारों और मगरा क्षेत्र के ठेठ गांव तक झंडियों व बैनर से अटे हुए हैं। पिछली तस्वीर देखे तो 1993 और 1998 के चुनाव में यहां कांग्रेस के माधवसिंह दीवान चुनाव जीते थे। दोनों ही चुनाव में प्रतिद्वंद्वी के तौर पर भाजपा के उम्मीदवार रहे लक्ष्मीनारायण दवे मैदान में थे। लेकिन, 2003 में यह सीट दवे की झोली में गई। हालांकि, 2008 में परिसीमन के बाद रायपुर विधानसभा खत्म होने के साथ ही इसका काफी हिस्सा सोजत विधानसभा क्षेत्र में आ गया। एससी सीट पर भाजपा ने पहली बार संजना आगरी को नए चेहरे को चुनावी रण में उतारा। वह लगातार दो बार यहां से जीती। इस तरह 15 साल से तो ये सीट भाजपा का ही गढ़ बनी हुई है।


इस बार भाजपा ने रायपुर प्रधान शोभा चौहान के नाम की घोषणा की तो अंदरुनी गुटबाजी शुरू हो गई। हालांकि, खुलकर तो शोभा चौहान का विरोध नहीं हो रहा है। लेकिन, कुछ कार्यकर्ता भीतरघात में जुटे हैं। इधर, कांग्रेस ने भी नए चेहरे पाली की पूर्व प्रधान व कांग्रेस की प्रदेश सचिव शोभा सोलंकी को मैदान में उतारा है। इनके पास राजनीतिक अनुभव तो है, लेकिन सोजत के समग्र क्षेत्र में पकड़ का अभाव है। उच्च शिक्षित होने से युवा वर्ग पर अच्छी पकड़ है। इनके अलावा 14 प्रत्याशी भी जातिगत समीकरणों को बिगाड़ रहे हैं। खास बात ये है कि कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे माधवसिंह दीवान के भाजपा में शामिल होने से कुछ हद तक उनके इस क्षेत्र में व्यापक असर का भाजपा लाभ लेने की कोशिश में
जुटी हुई है।

मुद्दे, जो अब भी जनता के जेहन में
चलते-चलते मतदाताओं से रुझान जाना तो सामने आया कि लोग मादक पदार्थ की तस्करी से युवा वर्ग के गलत राह पर जाने से चिंता में हैं। राजकीय महाविद्यालय के स्नातकोत्तर में क्रमोन्नत नहीं होने से युवा आक्रोशित है। सोजत में ट्रोमा यूनिट का निर्माण अब तक नहीं होने से लोग खफा है। कुछ जवाई का पानी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। सोजतरोड के अजीम खां को शिकायत है कि भाजपा की नीतियों से वृद्धजनों को परेशान होना पड़ रहा है। सोजत के बस कंडक्टर राजेन्द्र सेन के अनुसार नोटबंदी से सभी का व्यापार खराब हुआ है। चाय की दुकान चलाने वाले घीसूलाल को तो लगता है, सभी समस्याओं का हल भाजपा सरकार बनने पर ही हो सकता है। उनकी होटल पर दिनभर चुनावी चौपाल सजी रहती है।

आंकड़ों की जुबानी
कुल बूथ - 248
प्रत्याशी - 16
कुल मतदाता
- 2 लाख 22 हजार 619
महिला मतदाता
- 1 लाख 8 हजार 749
पुरुष मतदाता
- 1 लाख 13 हजार 869

वोट तो विकास पर ही
क्षेत्र में विकास की तस्वीर बदलनी चाहिए। जो भी विकास करेगा। वोट तो उसी को देगें। महिलाओं को पूरा सम्मान मिलना चाहिए। -डगरी देवी सीरवी, सोजतरोड
यूथ को मिले रोजगार
जो भी जनप्रतिनिधि चुना जाए, वो युवाओं को रोजगार देने वाला होना चाहिए। युवाओं पर फोकस होने से देश विकास की राह पर बढ़ सकेगा। -याोगेश प्रतापसिंह, रायपुर


प्रत्याशी का हाल क्या है?
शोभा चौहान, भाजपा
ताकत: प्रधान के चलते रायपुर क्षेत्र में बना जनाधार, रायपुर पंचायत समिति की अधिकांश पंचायतों में पकड़, जातिगत के साथ ही सामान्य मतों का सहारा
कमजोरी: सोजत विधानसभा क्षेत्र में समग्र पकड़ का अभाव, टिकट बदलने से पार्टी के ही एक खेमे के कुछ कार्यकर्ताओं की नाराजगी, क्षेत्र की कुछ पंचायतों में ही प्रतिद्वंद्वी पार्टी के समर्थकों की पकड़


शोभा सोलंकी, कांग्रेस
ताकत: दस साल का राजनीतिक अनुभव, पाली जिला मुख्यालय पर पूर्व प्रधान का दायित्व संभालने का अनुभव, उच्च शिक्षित होने का फायदा, परम्परागत वोट बैंक के साथ ही जातिगत वोटों का फायदा,
कमजोरी: सोजत विधानसभा के लिए नया चेहरा, कुछ चुनिंदा गांवों में ही पकड़ मजबूत, बाहरी उम्मीदवार का भी तमगाऐसे समझें


जातीय समीकरण
सीरवी - 30996
राजपूत - 19926
घांची - 15498
माली - 13284
कुम्हार - 13270
राजपुरोहित - 12177
ब्राह्मण - 8856
जाट - 8856
देवासी - 8870
जैन - 3321
रावणा राजपूत - 2214
एससीएसटी - 69741
मुस्लिम - 11040
अन्य - 3183 (अनुमानित आंकड़े)
पन्द्रह साल से विधायक
2003- लक्ष्मीनारायण दवे
2008- संजना आगरी
2013- संजना आगरी