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पीने के पानी के भी पड़ सकते हैं लाले, जिले में 17 साल में सबसे कम बारिश

-जवाई बांध में आठ माह का शेष है पानी-3 लाख हैक्टेयर में 540 करोड़ रुपए किसानों के बुवाई में खर्च हो गए
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पाली

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Suresh Hemnani

Aug 14, 2018

Drinking Water crisis in Pali

पीने के पानी के भी पड़ सकते हैं लाले, जिले में 17 साल में सबसे कम बारिश

पाली। पिछले 17 साल में इस साल अब तक सबसे कम बारिश हुई है। 45 दिन की बारिश की सीजन में महज 10 दिन ही बारिश के निकले हैं, जिसमें भी मात्र 215 एम.एम. ही बारिश हुई। 15 दिन का ही मानसून शेष रहा है। इसमें भी बारिश नहीं हुई तो किसानों को जबरदस्त नुकसान झेलना पड़ेगा। इतना ही नहीं, जिले में पेयजल संकट गहराने के भी संकेत हैं। जवाई में महज आठ महीने तक का पानी बचा है। बारिश नहीं होने से किसानों के हाथ से खरीफ की फसल तो निकल ही जाएगी, बांध खाली होने से करीब डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि सिंचाई से भी वंचित रह जाएगी। किसानों को रबी की फसल भी हाथ नहीं लगेगी। इससे पहले वर्ष 2002 में ही महज 168.24 एमएम बारिश हुई थी।

जवाई बांध में सिर्फ आठ माह का पानी
जलसंसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक बारिश से पूर्व जवाई बांध में 28 फीट पानी था। बारिश में 6 फीट पानी की आवक हुई। अभी जवाई बांध में 34.70 फीट पानी है। यह पानी जिलेवासियों की आठ माह तक प्यास बुझा सकता है। बारिश नहीं हुई तो यह पानी मार्च तक ही चलेगा। मई जून की भीषण गर्मी में जिलेवासियों के सामने पीने के पानी का भयंकर संकट खड़ा हो जाएगा। जलसंसाधन विभाग के पास जिले में 52 बांध है। इसमे से सिर्फ जवाई बांध में ही पानी है। आठ दस बाधों में नाममात्र का पानी है। सारे बांध सूखे पड़े है। बांधों से जिले में करीब डेढ़ लाख हैक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।

इधर, खेतों में जल रही फसलें
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक अभी तक 5 लाख 59 हजार हैक्टेयर भूमि में खरीफ फसल की बुवाई हो गई है। पाली, सोजत, रायपुर, जैतारण, रानी व बाली क्षेत्र में एक बार ही बारिश हुई है। इस कारण इस क्षेत्र में बाजरा व ज्वार की फसलें तो जलने लग गई है। मूंग व तिल की फसल पांच-दिस दिन और खड़ी रह सकती है। इसके बाद यह फसल भी जल जाएगी। सुमेरपुर, देसूरी व मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में दूसरी बार ठीकठाक बारिश हुई। यहां पर फसले अभी तक हरी-भरी है। पांच लाख हैक्टेयर भूमि में से तीन लाख हैक्टेयर भूमि में फसलें जलनी शुरू हो गई। एक हैक्टेयर में किसानों का बुवाई में करीब 18 हजार रुपए खर्चा आता है। इस हिसाब से किसानों के 3 लाख हैक्टेयर भूमि में करीब 540 करोड़ रुपए डूब जाएंगे।

मार्च तक का प्रबंध
- जवाई बांध में 34.70 फीट पानी है। यह अगले साल के मार्च माह तक चल सकता है। बारिश नहीं हुई तो अगले साल मई.जून में पेयजल का संकट भी खड़ा हो सकता है। -चन्द्रवीरसिंह उदावत, अधिशासी अभियंता, जवाई बांध

आंकड़ों की जुबानी
2002 - 168.24
2003 - 353.67
2004 - 353.67
2005 - 392.97
2006 - 637.40
2007 - 550.57
2008 - 233.22
2009 - 271.89
2010 - 553.77
2011 - 616.44
2012 - 529.67
2013 - 505.78
2014 - 508
2015 - 514.37
2016 - 818.85
2017 - 496.46
2018 - 215
(आंकड़े मिलीमीटर में)