
बीच राह दर्द दे रहे मवेशी, राहगीर व बाइक सवार चोटिल होकर पहुंच रहे अस्पताल
पाली। शहर सहित जिले में कई गांवों की सडक़ों पर इन दिनों मवेशियों का जमघट है। इनकी चपेट में आकर रोजाना दो-तीन जने घायल होकर अस्पताल पहुंच रहे हंै। रविवार को भी बांगड़ अस्पताल में ऐसे चार मरीज भर्ती थे, जो सडक़ पर विचरण कर रहे मवेशियों की चपेट में आ गए थे। पूर्व में कइयों की
तो मवेशियों की चपेट में आने से मौत तक हो चुकी है। लेकिन, शहर विकास का दावा करने वाली शहरी सरकार शहरवासियों को इस समस्या से निजात दिलाने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा सकी है।
केस एक -मवेशी की चपेट में आया दम्पती
पुराना हाउसिंग बोर्ड निवासी सुनील तिवारी अपनी पत्नी सुनीता के साथ
रविवार को बाइक से जा रहे थे। पांच मौखा पुलिस के निकट अचानक उनकी गाड़ी
के आगे मवेशी आ गया। इससे टकराकर दोनों नीचे गिर गए।
केस दो - दो दिन से अस्पताल में भर्ती
प्रतापगढ़ (सोमेसर) निवासी समर्थलाल पुत्र दुर्गाराम चौधरी 11 अगस्त को
निम्बाडा के निकट से गुजर रहे थे। सडक़ पर अचानक मवेशी आने से नीचे गिरकर
घायल हो गए। जिनका बांगड़ अस्पताल में उपचार जारी है।
केस तीन - मवेशियों के कारण झेल रहा दर्द
पांचेटिया निवासी (मारवाड़ जंक्शन) जीवाराम पुत्र चेनाराम रेगर 10 अगस्त
को बाइक से जा रहे थे। गुड़ा जेतसिंह के निकट मवेशी की चपेट में आने से
घायल हो गए। जिनका उपचार बांगड़ अस्पताल में चल रहा है।
पूर्व के कलक्टर भी मान चुके थे बड़ी समस्या
पूर्व जिला कलक्टर नीरज के पवन, अमरीष कुमार, रोहित गुप्ता और वर्तमान
जिला कलक्टर सुधीर कुमार शर्मा ने शहर की सडक़ों पर विचरण कर रहे
मवेशियों को शहर की बड़ी समस्या बता चुके हैं। इसके समाधान को लेकर अपने
कार्यकाल में आयोजित हुई बैठकों में भी इसको लेकर नगर परिषद आयुक्त को
निर्देश दिए। लेकिन समस्या आज भी यथावत है।
हाइवे पर अधिकतर हादसे मवेशियों के कारण
हाइवे पर होने वाले हादसों में अधिकतर मवेशियों के कारण होते हैं। शाम
ढलने के बाद मवेशी हाइवे पर बैठ जाते है। ऐसे में कई बार वाहन चालक इनकी
चपेट में आकर घायल हो जाते है तो कइयों की मौत तक हो जाती है। हादसे में
मवेशियों की भी मौतें होती है। उसके बाद भी इसके समाधान को लेकर पुख्ता
कार्य नहीं किया जा रहा।
Published on:
13 Aug 2018 11:02 am
