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पत्रिका स्टिंग में खुलासा : हाईकोर्ट की मनाही के बावजूद बांडी नदी की छाती की जा रही छलनी

नदी में बिछाई भूमिगत पाइप लाइन, खुलेआम नदी में बहाया जा रहा है रंगीन पानी
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हाईकोर्ट की मनाही के बावजूद बांडी नदी की छाती की जा रही छलनी

राजेन्द्रसिंह देणोक व सुरेश हेमनानी

पाली. देशभर में प्रदूषण के कलंक से बदनाम हो चुके पाली के कपड़ा उद्योग की करतूत अब भी थमने का नाम नहीं ले रही। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट की साफ मनाही है कि औद्योगिक इकाइयों का प्रदूषित अथवा रंगीन पानी नदियों और प्राकृतिक जलस्रोतों में किसी भी सूरत में नहीं छोड़ा जाए, इसके बावजूद शहर के मुहाने से निकल रही बांडी नदी की छाती बेखौफ छलनी की जा रही है। पत्रिका ने मंगलवार दोपहर बांडी नदी का जायजा लिया तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। भूमिगत पाइप लाइन से नदी में बह रहे रंगीन पानी का वीडियो पत्रिका के पास उपलब्ध है।

यूं हुआ खुलासा
पत्रिका के विश्वसनीय पाठक ने सूचना दी कि बांडी नदी में काफी मात्रा में रंगीन पानी भरा पड़ा है। इसकी तस्दीक करने के लिए मंगलवार दोपहर टीम बजरंग बाड़ी इलाके में पहुंची। नदी में काफी अंदर तक जाने पर यह तो खुलासा हो गया कि रंगीन पानी काफी मात्रा में भरा है, लेकिन कहां से आ रहा है इसका कोई छोर दिखाई नहीं दिया। टीम काफी देर तक नदी में अंदर तक पैदल घूमती रही। आखिरकार, रंगीन पानी की तेज बोछार छोड़ती एक भूमिगत पाइप लाइन पर नजर पड़ी। पाइप से तेजी से पानी नदी में बहता दिखाई दिया। निकट जाने पर चौंकाने वाली जानकारी मिली। यह पाइप लाइन भूमिगत रूप से बिछाई हुई है। इसका कनेक्शन पास ही बने एक भवन से है, जिसमें अवैध रूप से कपड़े की धुलाई इत्यादि का काम हो रहा है। हैरानी की बात यह है कि फैक्ट्री का निर्माण पक्का है और पाइप लाइन भी भूमिगत। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां कितने समय से बेखौफ होकर बांडी की छाती छलनी की जा रही है।

एनजीटी की तलवार, फिर भी नहीं ली नसीहत

पाली के कपड़ा उद्योग पर एनजीटी की तलवार लम्बे समय से लटक रही है। एनजीटी द्वारा औद्योगिक इकाइयों को नियमों से चलाने की सख्त हिदायत कई बार दे चुकी है। इसके उपरांत कुछ उद्यमी बाज नहीं आ रहे हैं और रंगीन पानी नदी में बहा रहे हैं। उद्यमियों के इस रवैये से कपड़ा उद्योग की साख भी लगातार गिर रही है। यही स्थिति रही तो समूचे उद्योग को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।