
सोशल प्राइड : यहां नाम की नहीं चाह : तालीम देने को तत्पर हैं हर ‘गुमनाम’, जानिए पूरी खबर...
- दो संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा को बढ़ावा देने में कर रहे सहयोग
- साल में एक दिन तनख्वाह देते हैं बच्चों के लिए
पाली। आज के युग में हर कोई नाम की चाह में पैसा और समय देता है, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी है। जिनको नाम और सम्मान की चाह नहीं है। वे गुमनाम रहकर ही ऐसा कार्य कर रहे हैं जो हर व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है। इस कार्य में नाम हो रहा है सिर्फ उन संस्थाओं का, जिनके माध्यम से तालीम को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अल्पसंख्यक समुदाय में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यक वेलफेयर एज्युकेशन सोसायटी, अल्पसंख्यक कर्मचारी अधि. संघ और ग्रामोदय बहुउद्देश्य सेवा समिति जुटी हुई है। इस समिति की ओर से किसी तरह का फंड तक नहीं लिया जा रहा है। उसके बिना ही रसीद दे दी जाती है। जिसमें लिखा होता है उस व्यक्ति का नाम जो स्कूल में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शिक्षण सामग्री, यूनिफार्म, जूते-मोजे या अन्य सामग्री भेंट कर रहा होता है। सामग्री भी संस्था स्वयं बांटने के बजाय उस व्यक्ति से ही स्कूल में बंटवाती है।
नहीं बताते बच्चों को
बच्चों को यह सामग्री देने के बाद संस्थाओं की ओर से उनका फोटो तक नहीं निकाला जाता है। संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार सामग्री देते समय बच्चों का फोटो लेने से उनमें निर्धन होने की भावना आ सकती है। जो हमारे शिक्षा का दीपक जलाने के उद्देश्य को प्रभावित कर सकती है।
सरकारी स्कूल के बच्चों की सहायता
संस्था की ओर से जिन लोगों को शिक्षा के लिए बढ़ावा देने को तैयार किया जाता है। उनसे सहायता महज सरकारी स्कूल में पढऩे वाले विद्यार्थियों की करवाई जा रही है। संस्था सदस्यों का कहना है कि निजी शिक्षण संस्थाओं में शुल्क देने वाले शिक्षण सामग्री के साथ अन्य खर्च वहन कर सकते हैं।
कोचिंग करवाने की व्यवस्था
इसके साथ ही संस्था की ओर से सीनियर सैकण्डरी में 80 प्रतिशत या उच्च कक्षाओं में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग की व्यवस्था भी की जा रही है। उनको आरएएस व आइएएस की कोचिंग करवाने की भी कवायद की जा रही है।
एक दिन की तनख्वाह देने को करते प्रेरित
हमारी संस्था हर सरकारी या निजी कर्मचारी को वर्ष में एक दिन की तनख्वाह अल्पसंख्यक निर्धन बच्चों के लिए देने को प्रेरित करती है। उनको ही सामान खरीदकर बांटने को कहती है। हम सिर्फ स्कूल बताते हैं और पर्ची काटकर देते हैं। किसी तरह का दिखावा नहीं करते हैं। -दिलदार अली, जिलाध्यक्ष, अल्पसंख्यक, कर्म अधि. संघ, पाली
Updated on:
27 Apr 2019 03:21 pm
Published on:
27 Apr 2019 03:21 pm
