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अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में आबादी से दूर बनेंगे क्वारेंटाइन सेंटर, सीसीटीवी कैमरे से होगी सख्त निगरानी

-चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने इसके लिए सभी जिला कलक्टर्स को किया है निर्देशित
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पाली

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Suresh Hemnani

Apr 18, 2020

अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में आबादी से दूर बनेंगे क्वारेंटाइन सेंटर, सीसीटीवी कैमरे से होगी सख्त निगरानी

अब प्रदेश के प्रत्येक जिले में आबादी से दूर बनेंगे क्वारेंटाइन सेंटर, सीसीटीवी कैमरे से होगी सख्त निगरानी

पाली। प्रदेश के सभी जिलों में अब ऐसे क्वारेंटाइन सेंटर [ Quarantine Center ] बनाए जाएंगे, जो रहवासीय इलाकों से दूर होंगे। इनकी सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए जाएंगे। इन सेंटर्स की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जाएगी। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग [ Medical, Health and Family Welfare Department ] ने इसके लिए सभी जिला कलक्टर्स को निर्देशित किया है। यह कवायद कोविड-19 [ Kovid-19 ] से संभावित जोखिम वाले हाउसिंग पर्सनल से निपटने के लिए की जाएगी।

जिला कलक्टर दिनेशचंद जैन ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहितकुमार सिंह ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनमें कहा गया है कि कोरोना से जुड़े किसी भी संदिग्ध केस के क्वारेंटाइन की समय अवधि 14 दिन की है। अब क्वारेंटाइन सेंटरों में रखे गए ऐसे लोगों की 13वें दिन कोविड-19 की जांच के लिए नमूना लिया जाएगा। यदि लैब परीक्षण में जांच रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो संबंधित को 14 दिन का समय पूरा होने पर डिस्चार्ज कर घर भेज दिया जाएगा। लैब परीक्षण जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने की दशा में ऐसे कोविड रोगी को क्लीनिकल आकलन के आधार पर चिकित्सकीय सुविधा दी जाएगी।

उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव, रोकथाम एवं संक्रमण की शृंखला को तोडऩे के लिए इससे प्रभावित संदिग्ध लोगों के लिए क्वारेंटाइन सेंटरों की स्थापना में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वहां तक आमजन की पहुंच ना हो। यह सुविधा शहर के रिहायशी क्षेत्रों से दूर स्थापित करने को कहा गया है। यहां सिक्योरिटी तथा सीसीटीवी से निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें। ऐसे सेंटर्स में प्राथमिकता के साथ व्यक्तिगत कमरों की व्यवस्था व शौचालयों की उपलब्धता के साथ अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है।

साथ ही ऐसे सेंटरों में प्रशासनिक यूनिट, क्लीनिकल परीक्षण, मेडिकल स्टेशन, खान-पान की सुविधा, लांड्री सेवा एवं आवश्यकता के अनुरूप अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्थान की सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। ऐसे सेंटर्स में नियमित बैड शीट्स बदलने के साथ सेंटर को रोजाना सोडियम हाइपोक्लोराइड सॉल्यूशन से विसंक्रमित करने तथा वित्तीय आवश्यकता के लिए राज्य आपदा राहत कोष से व्यवस्था करने को कहा गया है।