4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मजबूत क्षत्रप का दुर्ग भेदने की कवायद में एनसीपी – निर्दलीय

-बाली विधानसभा क्षेत्र
3 min read
Google source verification

पाली

image

Suresh Hemnani

Dec 01, 2018

Rajasthan Legislative Assembly election 2018

मजबूत क्षत्रप का दुर्ग भेदने की कवायद में एनसीपी - निर्दलीय

पैंथर अभयारण्य और विश्व वि यात जैन मंदिर रणकपुर के लिए प्रसिद्ध बाली राजनीतिक रूप से प्रदेश की हॉट सीट है। 25 साल से एकछत्र राज कर रही भाजपा को इस बार एनसीपी-निर्दलीय कितनी चुनौती दे पाएंगे, ये चर्चा का विषय है। भाजपा के कद्दावर नेता भैरोंसिंह शेखावत यहां से दो बार चुनाव जीते। एक बार सीएम रहे और दूसरी बार नेता-प्रतिपक्ष। उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद यहां हुए उपचुनाव में पुष्पेन्द्र सिंह ने सीट निकाली। पुष्पेंद्र सिंह तब से लगातार जीतकर चुनावी दंगल के मजबूत क्षत्रप के रूप में उभरे हैं। पार्टी ने भी उन्हें पांचवी बार किस्मत आजमाने उतारा है। इधर, कांग्रेस ने इस बार इस दुर्ग को स्वयं भेदने की बजाय एनसीपी को समझौते में सीट सौंप दी। एनसीपी से उम्मेद सिंह चा पावत मैदान में हैं। इतना तय है कि इस बार मतदाता किसी लहर पर सवार होने की बजाय मुकाबले को दिलचस्प मोड़ देंगे।

रमेश शर्मा
बाली। जिले की ये एकमात्र ऐसी सीट है जिसे आमतौर पर भाजपा के लिए ‘सेफ’ माना जा रहा था। विधानसभा क्षेत्र में प्रवेश करते ही बैनर-पोस्टर चुनावी माहौल का अहसास करा रहे हैं। भाजपा, एनसीपी के अलावा अन्य उम्मीदवार भी प्रचार माध्यमों से सुर्खियां बटोरने में लगे हैं। यहां भाजपा का उम्मीदवार कौन होगा, इस पर कभी कोई खास संशय नहीं रहा। सामने कौन होगा, इस पर जरूर ल बे समय तक असमंजस रहा। नामांकन की तिथि से एक दिन पहले कांग्रेस ने तय किया कि एनसीपी के भरोसे उनकी पतवार होगी। अब राणावत गढ़ बचाने की जी-तोड़ कोशिश में हैं। वहीं चांपावत को उम्मीद है कि समझौते की रणनीति कामयाब होगी। हाल ही कांग्रेस छोड़ उम्मेद सिंह ने एनसीपी का दामन थामा और प्रदेशाध्यक्ष बन गए।

उम्मेद सिंह एक बार पहले भैरोंसिंह शेखावत के सामने भी चुनाव लड़ चुके हैं और उन्हें कांटे की टक्कर दी थी। इस बार भी मुकाबला कांटे का है। वैसे मजे की बात है कि आमतौर पर सीधे माने जा रहे मुकाबले को दो निर्दलीयों ने रोचक बना दिया है। मजबूत जातिगत आधार वाली प्रत्याशी इंदु चौधरी और भारत वाहिनी पार्टी के राजूगिरी भाजपा और एनसीपी दोनों के लिए सिर दर्द बनकर उभरे हैं। बसपा के दानाराम, निर्दलीय सुरेन्द्रसिंह, जयपालसिंह, शैलेषकुमार और हरिराम भी मतदाताओं का भरोसा जीतने का प्रयास कर रहे हैं। अन्य विधानसभाओं की तरह यहां भी चुनाव किन्ही खास मुद्दों पर लड़ा जा रहा हो, ऐसा नहीं लगता।

हार-जीत जातीय समीकरण में उलझती जा रही है। निर्दलीय उ मीदवार ओबीसी कार्ड पर जातीय ध्रुवीकरण की कोशिशों में लगे हैं। हालांकि नरेश ओझा पुष्पेन्द्र सिंह के वोटों के बंटवारे की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहते हैं जनता से जुड़ाव ही उनकी ताकत है। प्रत्याशी की सहज, साफ-सुथरी छवि और संगठन की मजबूत कड़ी कहीं न कहीं उसे फायदा पहुंचा सकती है। जबकि एनसीपी के लिए चिंता की बात यह है कि कांग्रेस का पूरा संगठन अभी मन से नहीं जुड़ा दिख रहा। सादड़ी के प्रफुल्ल जैन का कहना है कि मतदाता किसी बहकावे में नहीं आएगा। नारलाई के अजीतसिंह राव विकास के नाम पर मोहर लगाने का दावा कर रहे हैं।

भावेश देवासी का मानना है
जातिवाद से ऊपर उठकर वोट होना चाहिए। वे भी ऐसा ही करेंगे। बहरहाल, मतदाताओं का मूड भांपना इतना आसान नहीं लग रहा। परिणाम बताएंगे कितना प्रभावी रहेगा जातीय गठजोड़ आदिवासी बहुल बाली में कई जातियों का मजबूत वोट बैंक है। ये बात और है कि यहां जातिगत गठजोड़ पिछले 25 सालों में कभी कामयाब नहीं रहा। इस बार भी जातीय समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। बड़ी जातियों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रत्याशियों ने पूरा जोर दे रखा हैं। अन्य कितने वोट जुटा पाएंगे, इस पर जीत की गणित निर्भर करेगी।

स्वच्छ छवि का प्रत्याशी चुनेंगे
मेरा वोट स्वच्छ और ईमानदार छवि वाले प्रत्याशी को जाएगा। लोकतंत्र की मजबूती की लिए यह जरूरी है। -भावेश मालवीय, युवा मतदाता सेवाभावी प्रत्याशी हो

जनप्रतिनिधि सेवाभाव वाला होना चाहिए। इस बार चुनाव में ऐसा प्रत्याशी ही चुनेंगे जो आम जन के सुख दुख में साथ खड़ा रहे। -भगवती देवी, गृहिणी

जातीय समीकरण
जणवा -19000
सीरवी -17000
देवासी -21000
राजपूत -27000
रावणा राजपूत -14500
भोमिया -14500
घांची -9500
एससी -45000
एसटी -39000
मुस्लिम -12000

दोनों प्रत्याशी का हाल क्या है?
पुष्पेन्द्रसिंह राणावत, भाजपा
ताकत: सहज उपलब्धता, साफ-सुथरी छवि, मजबूत संगठन
कमजोरी: एंटी-इनक बेंसी, वोटों में सेंधमारी

उम्मेदसिंह च पावत, एनसीपी
ताकत: पूर्व में कांग्रेस से चुनाव लडऩे का अनुभव, जातिगत वोटों में सेंध
कमजोरी: लम्बे समय से क्षेत्र से जुड़ाव नहीं रहना, कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जुड़ाव नहीं