4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

मौसी के घर पहुंचे भगवान जगन्नाथ तो धूमधाम ने निकली बाबा रामदेव की शोभायात्रा

छोटा रूणेचा बाबा रामेदव मंदिर में आयोजित हुए धार्मिक कार्यक्रम, मौसी के घर पहुंचे भगवान जगन्नाथ , जयकारों के साथ निकली रथ यात्रा  
2 min read
Google source verification
Rath Yatra of Jagannath

छोटा रूणेचा बाबा रामेदव मंदिर में आयोजित हुए धार्मिक कार्यक्रम

पाली. छोटा रूणेचा बाबा रामदेव मंदिर में शनिवार को कई धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। सुबह शहर में मुख्य मार्गोंस से शोभायात्रा निकाली गई। वहीं बाबा रामदेव की पूजा अर्चना के बाद महाप्रसादी का आयोजन हुआ। समिति के प्रवक्ता तेजराज सोलंकी ने बतया कि मंदिर में पंचम पाटोत्सव के तहत शुक्रवार को सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया था। वहीं शनिवार को सुबह ध्वजा की शोभायात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें काफी संख्या में शहरवासियों ने भाग लिया। इस अवसर पर छोटा रूणेचा धाम में बाबा रामदेव की झांकी विदेशी आकर्षक फूलों से सजाई गई। सोलंकी ने बताया कि ध्वजा की शोभायात्रा सुबह ६.३० बजे गांधी नगर से रवाना होकर मंडिया रोड, जवाहर नगर, पंचम नगर, खेताराम जी की प्याऊ, हाउसिंग बोर्ड व जोधपुर रोड मार्ग होते हुए छोटा रूणेचा पहुंची। जहां पहुंचने के बाद मंदिर में महाप्रसादी का आयोजन हुआ। वहीं शाम को मंदिर में भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें जाने माने भजन कलाकारों ने एक से बढक़र एक भक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। कार्य्रम को सफल बनाने में कानाराम प्रजापत, भैराराम प्रजापत,

पाली. धानमंडी स्थित जगदीश भगवान मंदिर से शनिवार शाम जयकारों के साथ भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने प्रभु को नमन कर खुशहाली की कामना की। अग्रवाल पंचायत की ओर से शाम को मंदिर में पूजन व आरती के बाद जयकारों के साथ ही भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा व बलभद्र की रथ यात्रा जगदीश मंदिर से रवाना हुई। फुलों व रोशनी से सजे रथ में विराजमान प्रभु को श्रत्रालुओं ने शीश नवाया। रथ यात्रा एक-एक कदम सरकते हुए घी का घंडा, बाईसी बाजार होकर सर्राफा बाजार (भगवान की मौसी के घर) पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने प्रभु को शीश नवाया। इस मौके पर अध्यक्ष मदनमोहन गुप्ता व सचिव जगदीश गोयल सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

शामिल होते रहे श्रद्धालु

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के धानमंडी से रवाना होने के बाद सर्राफा बाजार पहुंचने तक श्रद्धाल उसमें शामिल होते रहे। इससे सर्राफा बाजार पहुुंचने तक बाजार में पैर रखने की जगह नहीं रही।