
समुद्र मंथन का आयोजन। फोटो: सुरेश हेमनानी व ड्रोन सहयोग : शरद भाटी
Pali News: पाली शहर के निकट उतवण गांव में 26 वर्ष बाद समुद्र मंथन (समद डोवण) की परम्परा साकार हुई। इस आयोजन में शरीक होने पांच सौ से अधिक बेटियां पीहर आई।
फिर भाइयों के साथ तालाब की पाल पर पहुंचकर समद डोवण की परंपरा को निभाया। इस दौरान भाइयों ने बहनों को चुनरी ओढ़ाई। इस अनूठे आयोजन के सैकड़ों लोग साक्षी बने।
पं. सुरेश दवे बगड़ी नगर ने बताया कि जल संरक्षण का संदेश देने के लिए व इन्द्र देव को प्रसन्न करने के लिए समद डोवण की परम्परा चली आ रही है।
समद डोवण में गांव का मुखिया पहले पूजन करता है। इसके बाद भाई जलाशय में जाकर बहन को चुनरी ओढ़ाते हैं। जिस महिला के भाई नहीं होता, उसे गांव से ही कोई धर्मभाई बनकर चुनरी ओढ़ाता है।
समुद्र मंथन के आयोजन में ग्रामीण ढोल-डीजे की धुन पर पहुंचते हैं। इन दिनों मारवाड़-गोडवाड़ में इन आयोजनों की धूम मची है। इस आयोजन में भाग लेने के लिए काफी संख्या में प्रवासी पहुंचने लगे हैं।
मारवाड़-गोडवाड़ के गांवों के नाड़ी-तालाब के पानी से लबालब होने के बाद बहनों के साथ मिलकर भाइयों के पूजन करने जाने की परम्परा बरसों से चली आ रही है।
यह आयोजन गांव का सामूहिक होता है। इसमें तिथि तय करके विवाहित बेटियों को भी आमंत्रित करते हैं। फिर वे भाइयों के साथ तालाब पर पहुंचकर समद डोवण करती हैं, ताकि उसके भाई के गांव-घर में सुख-समृद्धि बनी रहे।
Published on:
05 Sept 2025 11:37 am
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