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प्रधानमंत्री आवास के लिए जमीन नहीं मिली तो सरपंच ने दे दी खुद की जमीन

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पाली

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Suresh Hemnani

Feb 08, 2019

Sarpanch of Jalore district gave his land

प्रधानमंत्री आवास के लिए जमीन नहीं मिली तो सरपंच ने दे दी खुद की जमीन

जेताराम विश्नोई
चितलवाना। प्रतिस्पद्र्धा के युग में हर किसी को धन कमाने की होड़ लगी हुई है, लेकिन जालोर जिले के चितलवाना क्षेत्र के दांतिया ग्राम पंचायत की सरपंच ने गरीबों को प्रधानमंत्री आवास के लिए जमीन नहीं मिलने पर खुद की जमीन आवंटित कर दी। वहीं जमीन मिलने के बाद योजना के तहत मिली राशि से इनें से कुछ लोगों ने आशियाना भी बना लिया है।

पंचायत में ऐसे करीब 20 भूमिहीन हैं, जिन्हें इस योजना के तहत फायदा मिलना है। फिलहाल सरपंच ने इनमें से पांच जानों के लिए खुद की कृषि भूमि से भूखण्ड आवंटित कर पट्टे जारी किए हैं। जिन पर इन पांचों भूमिहीनों ने आवास भी बना लिए हैं। अब शेष बचे भूमिहीनों के लिए भी वे प्रयास कर रही हैं। गौरतलब है कि दांतिया सरपंच भगवतकंवर ने सरपंच बनने के बाद पंचायत के विकास के साथ ही गरीबों के उत्थान को लेकर कई कार्य प्राथमिकता से करवाए। पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अब भूमिहीनों को आवास के लिए जमीन नहीं मिली तो उन्होंने खुद की जमीन से ही इन गरीबों को आशियाना दिलवाया।

खुद की जेब से देंगी पेंशन
सरपंच ने बताया कि पंचायत क्षेत्र के गरीब लोगों की मदद के लिए वे हमेशा तत्पर रहती हैं। विधवा, दिव्यांग व वृद्ध लोगों मार्च महीने से वे खुद के खर्च से प्रतिमाह 200 रुपए कीपेंशन भी शुरू करेंगी। इसके अलावा गांव का कोईभी निर्धन परिवार भूखा ना सोए इसके लिए भी वे खुद के घर से अनाज व राशन सामग्री भी वितरित कर रही हैं।

हर बच्चा हो शिक्षित
पंचायत के हर वर्ग के बच्चों को सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में शिक्षा दिलाने के लिए अभिभावकों से समझाइश की जाती है। साथ ही सरकारी विद्यालय में खुद जाकर बच्चों पढ़ाने में भी नहीं चूकती हैं। पंचायत का काम पूरा होने के बाद समय मिलते ही वे स्कूल में जाकर बच्चों को पढ़ाई भी करवाती हैं।

बालिका उत्थान में भी आगे
दांतिया सरपंच गरीबों के हितार्थ कार्य के साथ ही बालिका उत्थान को लेकर भी कई नवाचार ला रही हैं। पंचायत के गांवों में बालिका के जन्म पर 1100 रुपए का पुरस्कार दिया जा रहा है। ताकि बेटा-बेटियों में फर्क मिटाया जा सके। बालिका के जन्म लेने पर माता-पिता को यह राशि प्रोत्साहान रूप में दी जाती है।

इनका कहना...
सरपंच बनने के बाद मेरी पहली प्राथमिकता गरीबों के उत्थान की रही है। ताकि हर ग्रामीण सक्षम व आत्मनिर्भर बन सकें। - भगवतकंवर, सरपंच, दांतिया