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पाली समाचार: सेई टनल की टक-टक चाल, जवाई बांध को भरने की उम्मीदों पर फिरता नजर आ रहा पानी

Rajasthan Irrigation Department: पाली के जवाई बांध को भरने के लिए सेई बांध की टनल को गहरा करने का काम ठप पड़ा है। जनवरी में शुरू होने वाला काम ठेकेदार की लापरवाही के कारण शुरू नहीं हो सका है, जिससे मानसून से पहले प्रोजेक्ट पूरा होने पर संकट खड़ा हो गया है।

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Sei Dam Tunnel Project expansion delay

सेई बांध की टनल जिसका काम अटका हुआ है। फोटो: पत्रिका

Sei Dam Tunnel Project: पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा माने जाने वाले जवाई बांध को भरने की उम्मीदों पर फिर से पानी फिरता नजर आ रहा है। सेई बांध की टनल को गहरा करने का काम कछुआ चाल से चल रहा है, जिससे इस साल भी काम पूरा होने पर सस्पेंस बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि टनल का काम जनवरी में ही शुरू होना था, लेकिन फरवरी बीतने को है और ठेकेदार ने अभी तक काम की सुध नहीं ली है।

क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?

सेई बांध से जवाई बांध तक पानी पहुंचाने वाली 7 किलोमीटर लंबी सुरंग को करीब 65.24 करोड़ रुपए की लागत से 1.50 मीटर और गहरा किया जा रहा है। वर्तमान में इसकी गहराई 2.6 मीटर है। विभाग का लक्ष्य है कि इस सुरंग की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि बरसात के दौरान व्यर्थ बहने वाला पानी जवाई बांध में तेजी से लाया जा सके। सुरंग गहरी होने के बाद पानी डायवर्ट करने की क्षमता 34 MCFFT से बढ़कर 75 MCFFT हो जाएगी।

आंकड़ों की मानें तो पिछले 30 सालों में सेई बांध कई बार ओवरफ्लो हुआ है। टनल की क्षमता कम होने के कारण करीब 2325 मिलियन घनफीट पानी हर साल व्यर्थ बह जाता है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता है, तो यह पानी सीधे जवाई बांध में आएगा, जिससे पाली जिले की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।

तारीख पर तारीख: 2024 से 2026 तक का सफर

इस प्रोजेक्ट की डेडलाइन लगातार आगे बढ़ रही है। पहले इसे सितंबर 2024 में पूरा होना था, फिर इसे 2025 तक टाला गया और अब ठेकेदार ने जून 2026 तक का वादा किया है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अभी भी 280 मीटर टनल का काम बाकी है। इसके अलावा टनल की दीवारों पर शॉर्ट र्किटिंग और सिल्ट रोकने के लिए 720 मीटर लंबा बैरल बनाना भी शेष है।

निरीक्षण में आती है भारी दिक्कत

वर्तमान में टनल का रास्ता इतना पथरीला और दुर्गम है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निरीक्षण के लिए ट्रैक्टर का सहारा लेना पड़ता है। इस दौरान ट्रैक्टर की गति इतनी कम होती है कि महज कुछ किलोमीटर के निरीक्षण में ही 5 से 6 घंटे बर्बाद हो जाते हैं। पूरे टनल में सीसी (Concrete) रोड बनाने की योजना है ताकि भविष्य में आवाजाही आसान हो सके।

इन्होंने कहा

ठेकेदार को कई बार लिखित में कार्य शुरू करने के लिए अधिकारियों की ओर से कहा जा चुका है। इसके बावजूद वह कार्य नहीं कर रहा है। मई माह के बाद बरसात आने पर कार्य फिर बाधित हो सकता है।

- आकांक्षा रावत, सहायक अभियंता, सेई बांध