
कभी पूरे गांव की प्यास बुझाता था, आज पड़ा है विरान
देसूरी। हर मौसम में लोगों की प्यास बुझाने वाले कुओं पर आज संकट छाया है। जिन कुओं पर लगी घिरनी की आवाज और पानी की डोली गिरने की ध्वनि पूरे दिन सुनाई देती थी।
वहां आज विरानी छाई है। प्राचीन जलस्रोतों की उपेक्षा के कारण कई कुएं तो जर्जर हो गए है तो कई जमीदोज होने की स्थिति में पहुंच गए है। देसूरी क्ष्ेात्र के प्रत्येक गांव में सार्वजनिक कुएं आज भी मौजूद है। इन कुओं पर सुबह-शाम पानी भरने को लेकर पणिहारिनों की भीड़ लगती थी। अब घरों तक पानी के कनेक्शन पहुंचने से कुओं पर विरानी छा गई है। इसी कारण कुओं की साफ-सफाई तक नहीं की जा रही है।
महिलाएं पानी सिंचते हुए बांटती थी दुख-दर्द
कुओं पर महिलाएं सुबह ही मटकी और डोली लेकर आती थी। यहां घिरनी से डोली कुएं में डालकर मटकी भरते समय अपने दुख-सुख की बातें करती थी। महिलाओं के कारण कुएं पर पूरे दिन रौनक रहती थी। कुओं की देखभाल होने के कारण पेयजल की समस्या भी कभी नहीं रहती थी। हालांकि अब भी पानी की कमी होने पर महिलाएं कुओं पर आती है, लेकिन यहां वह यदा-कदा होता है।
बना दिया कचरा पात्र
कुओं की उपयोगिता कम होने के कारण ग्रामीणों ने इनकी तरफ देखना तक बंद कर दिया। कई ग्रामीणों ने तो कुओं को कचरा पात्र बना दिया है। संरक्षण के अभाव में कई कुओं की दीवारों में दरारे तक आ गइ्र है। वहीं कई कुएं मलबे पूरी तरह से दब गए है।
Published on:
02 Apr 2019 04:38 pm
