जोधपुर को मारवाड़ फ्रेट कॉरिडोर से जोडऩे वाले स्टेट हाइवे का काम रुका

- महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का काम बंद, समय पर काम पूरा होना मुश्किल

By: rajendra denok

Updated: 03 Mar 2019, 11:02 PM IST

 

- बजट नहीं मिलने से रुका काम

- अधूरी सडक़ पर हो रहे हादसे

पाली. दिल्ली-मुम्बई फ्रेट कॉरिडोर (डीएमएफसी) का ड्राई पोर्ट पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन में बन रहा है। व्यापारिक नगरी जोधपुर को इस कॉरिडोर से जोडऩे के लिए बनाए जा रहे जोधपुर-जोजावर हाइवे (स्टेट हाइवे-61) का काम इन दिनों बजट की कमी के कारण अटक गया है। एजेंसी को बाकी का बजट नहीं मिलने से इस प्रोजेक्ट में देरी संभव है। फिलहाल अधूरे काम पर राहगिरों का हाल बुरा हो रखा है। वाहन चालक रोज परेशान हो रहे हैं।

इसलिए महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट

बालोतरा में रिफाइनरी लग रही है। यहां बायोवेस्ट की कई इण्डस्ट्री भी लग रही है। जोधपुर भी व्यापार की दृष्टी से महत्वपूर्ण है। दिल्ली-मुम्बई फ्रेट कॉरिडोर का एक ड्राई पोर्ट मारवाड़ जंक्शन में बन रहा है। बालोतरा, जोधपुर सहित पश्चिमी राजस्थान के मालवाहक बड़े वाहन समय पर व आसानी से मारवाड़ जंक्शन पहुंचे, इसके लिए जोधपुर वाया सरदार समंद, जाडन, मारवाड़ जंक्शन होकर जोजावर तक स्टेट हाइवे का निर्माण करवाया जा रहा है। पिछले एक साल से यहां काम तेजी से चला, लेकिन वर्तमान में प्रोजेक्ट के लिए बाकी का करोड़ों का बजट नहीं मिलने से यह काम अटक गया है। फिलहाल यहां काम बंद है।

तीन टोल होंगे हाइवे पर

यह स्टेट हाइवे 119 किलोमीटर लम्बा है। एचजी इंफ्रा एजेंसी इसका निर्माण कर रही है। इस हाइवे पर तीन टोल होंगे। एक टोल जोधपुर जिले की सीमा व दो टोल पाली सीमा में लगेंगे। इस हाइवे के तैयार होने के बाद जोधपुर से मारवाड़ जंक्शन जाने वाले वाहनों को वाया पाली होकर गुजरने की जरूरत नहीं रहेगी। वे सीधे ही मारवाड़ जंक्शन आ-जा सकेंगे। इससे समय भी बचेगा और यात्रा की दूरी भी कम हो जाएगी।

काम रुकने से यह परेशानी

- दिनभर धूल का गुब्बार

- अधूरे काम से सडक़ पर हादसे

- कंकरीट से वाहनों को नुकसान

- प्रोजेक्ट में देरी संभव

- व्यापारियों को भी नुकसान

फैक्ट फाइल

61 - स्टेट हाइवे

119- किलोमीटर लम्बा हाइवे

304.11 - करोड़ रुपए होंगे खर्च

2020 - तक पूरा करना है काम

जोधपुर से जोजावर तक हाइवे

पीपीपी मोड पर काम

काफी काम हुआ है

इस हाइवे पर काफी काम हुआ है। फिलहाल बाकी का बजट मिलना है, बजट मिलते ही फिर से काम गति पकड़ेगा। समय पर काम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

- भूपेश सैनी, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पीपीपी, पीडब्लूडी, जोधपुर।

rajendra denok Reporting
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