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लॉकडाउन : दस हजार भेड़पालकों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट, फाकाकशी जैसे हालात

- आठ लाख भेड़ें कोटा, मध्यप्रदेश व गुजरात में चराई के लिए गई हुई है- लॉकडाउन [ Lockdown ] के कारण मांस की दुकाने बंद [ Meat shops closed ] होने से भेड़पालकों [ Sheep Spinach ] के बकरे व गेटे नहीं बिक रहे है
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पाली

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Suresh Hemnani

May 17, 2020

लॉकडाउन : दस हजार भेड़पालकों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट, फाकाकशी जैसे हालात

लॉकडाउन : दस हजार भेड़पालकों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट, फाकाकशी जैसे हालात,लॉकडाउन : दस हजार भेड़पालकों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट, फाकाकशी जैसे हालात,लॉकडाउन : दस हजार भेड़पालकों के सामने खड़ा हुआ रोजी-रोटी का संकट, फाकाकशी जैसे हालात

- राजेन्द्रसिंह दूदौड
पाली। देशभर में पिछले दो माह से लॉकडाउन [ Lockdown ] के कारण मुम्बई व हैदराबाद की बकरा मंडी [ Goat market ] बंद होने के कारण जिले भर में करीब दस हजार भेड़पालकों [ Sheep Spinach ] के सामने रोजी-रोटी का संकट [ Livelihood crisis ] खड़ा हो गया है। मांस की दुकाने बंद होने से भेड़पालकों के बकरे व गेटे नहीं बिक रहे है। जिससे भेड़पालकों को अपने परिवार का पेट पालना मुश्किल हो गया है। भेड़पालकों की मुख्य आमदनी बकरे व गेटे बिकने से ही होती है। मांस की दुकानें बंद [ Meat shops closed ] होने से बकरे व गेटे नहीं बिकने के कारण भेड़पालकों के सामने भेड़ों का पेट भरना भी एक चुनौती बन गया है। लॉकडाउन से भेड़पालकों की पूरी तरह से कमर टूट गई हैं। भेड़पालकों के सामने फाकाकशी की स्थिति पैदा हो गई है।

आठ लाख भेड़े प्रदेश के बाहर गई हुई है
जिले भर से करीब आठ लाख भेड़े कोटा, मध्यप्रदेश व गुजरात में चराई के लिए गई हुई है। करीब आठ हजार भेड़पालक भेड़ों के साथ कोटा, मध्यप्रदेश व गुजरात में अपने परिवार के साथ गए हुए है। लॉकडाउन के कारण कोटा, मध्यप्रदेश व गुजरात में भेड़पालकों के सामने भेड़ों को पालना व परिवार को भरण पोषण करना दिनों दिन मुश्किल होता जा रहा है।

दो लाख भेड़े जिले में है
दूसरे प्रदेशों में भेड़ें जाने के बावजूद भी जिले में करीब दो लाख भेड़े है। करीब दो हजार भेड़पालक इन भेड़ों पर आधारित है। लॉकडाउन के कारण जिले में भेड़पालकों की हालात भी पतली हो रही है। भेड़ों को जिंदा रखना भेड़पालकों के लिए चुनौती बन गई है।

ऊन भी नहीं बिकती है
भेड़पालकों के आमदनी के मख्य दो स्त्रोत ही है। पहला बकरा व गेटे मांस के लिए बिकते है। दूसरी भेडों की ऊन बिकती है। लेकिन विदेशी ऊन देशी ऊन के मुकाबले में सस्ती पड़ती है। इस कारण भेड़पालकों को ऊन कटाई के रुपए भी नहीं मिल पाते है। ऐसी स्थिति में भेड़पालकों के सामने बकरे व गेटे बिकने से होने वाली आय ही मुख्य स्त्रोत बचता है। लॉकडाउन के कारण यह स्त्रोत भी बंद हो गया है।

इन्होंने कहा...
भेड़पालकों के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया है। जिले भर में करीब दस हजार भेड़पालक है और करीब दस लाख भेड़े व बकरियां है। आठ लाख के करीब भेड़ें दूसरे प्रदेशों में चराई के लिए गई हुई है। मांस की दुकाने बंद होने से भेड़पालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। -अमराराम देवासी, पूर्व सरपंच धनला