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भाई-बहन के स्नेह की डोर से सज गया बाजार, आई बहार

- राखियों व नारियल की दुकानों पर भीड़ - 2 से 700 रुपए तक की मिल रही राखी
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The market is decorated with the love and affection of brother and sis

भाई-बहन के स्नेह की डोर से सज गया बाजार, आई बहार

पाली। भाई बहन के प्यार के पर्व रक्षा बंधन को लेकर में बाजार में बहार आ गई है। बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं। जहां राखियां लेने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं व युवतियां आ रही हैं। रक्षा बंधन में महज तीन दिन शेष रहने के कारण नारियल की बिक्री भी बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि रक्षा बंधन को लेकर लोगों में काफी उत्साह है।

एडी राखी का क्रेज
इन दिनों एडी राखी का क्रेज है। एडी राखी का मतलब है अमेरिकन डायमंड राखी। यह राखी सोने की तरह दिखती है। इसकी कीमत 500 से 700 रुपए तक है। इसी प्रकार स्टोन, फैन्सी व कलकत्ता की जरदोजी राखियां भी काफी बिक रही है। राखी विक्रेता कल्पेश लोढ़ा के मुताबिक 2 से लगाकर 700 रुपए तक की राखियां बिक रही है। स्टोन राखी 10 से 100 रुपए तक की बिक रही है। बच्चों के लिए टी.वी. सीरियर में आ रहे धारावाहिक जैसे सिंगचेन, डोरीमोन, टोम एण्ड जेरी व मोटू पतलू नाम की राखियां का प्रचलन ज्यादा है।

रक्षा बंधन पर दो करोड़ के नारियल बिकेंगे
रक्षा बंधन के पर्व पर पानी वाले नारियलों की काफी ज्यादा डिमांड रहती है। एक दुकान पर करीब 5 से 8 बोरी नारियल बिक जाते है। बिना पानी वाले नारियल (गोटे)की भी मांग है। रक्षा बंधन पर करीब दो करोड़ रुपए के नारियल व गोटे बकने की उम्मीद है। व्यापारी सुनिल राठौड़ ने बताया कि एक दुकान पर पानी वाले नारियलों की 5-6 बोरी की बिक्री जाती है। गांव के लोग ज्यादा गोटे लेते हैं। इस कारण गोटों की बिक्री भी इन दिनों काफी अधिक हो रही है।

हमारे खिलाडिय़ों ने लहराया परचम
पाली. जोधपुर के चौपासनी में मंडल स्तरीय स्काउट गाइड खेलों का आयोजन हुआ। जिसमे पाली के खिलाडिय़ों ने भाग लिया। छात्रा वर्ग कबड्डी में एमएस कवाड़ स्कूल और खो-खो में आई माता स्कूल उपविजेता रही। कबड्डी में आइजी विद्यापीठ जवाली की टीम संभाग में प्रथम स्थान पर रही। खो-खो, लम्बी कूद, भाला फेंक व 400 मीटर दौड़ में पाली गाइड की टीमें उपविजेता रही। संभाग स्तर पर विजेता रही टीम को जोधपुर के महापौर व मण्डल प्रधान घनश्याम ओझा, मण्डल चीफ कमिश्नर गोविन्द सिंह चारण व सहायक राज्य संगठन आयुक्त बाबुसिंह राजपुरोहित ने प्रमाण पत्र व शील्ड देकर सम्मानित किया।