
रोल क्षेत्र में बेमौसम बारिश के बाद झाड़ियों से केर (कैर) तोड़ती ग्रामीण महिला
Rajasthan Rain: रोल। मारवाड़ के मरुस्थलीय क्षेत्र की पहचान मानी जाने वाली केर-सांगरी इस बार बेमौसम बारिश की मार झेल रही है। सामान्यतः शुष्क और गर्म वातावरण में पनपने वाली यह पारंपरिक फसल अचानक हुई बारिश और बढ़ी नमी से प्रभावित हो गई है।
ग्रामीणों के अनुसार इस बार सांगरी के पौधों पर पर्याप्त फूल आए थे, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन मौसम बदलने से फूल झड़ गए और कई जगह फली बनने के बजाय गिलडु बन गए, जो उपयोगी नहीं माने जाते है। केर की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है, जिससे स्वाद और बाजार में मांग पर असर पड़ा है।
बाजार में केर का भाव करीब 300 रुपए प्रति किलो तक पहुंचा गया है, इसके बावजूद कम उत्पादन के कारण किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा। महिलाओं को अब दूर-दराज क्षेत्रों में दिनभर घूमने के बाद मुश्किल से एक किलो केर मिल पा रही है।
केर-सांगरी पोषण और सेहत के लिए लाभकारी मानी जाती है और इसकी मांग देश के साथ खाड़ी देशों, यूरोप और अमेरिका तक है। नागौर, बाड़मेर और जैसलमेर से इसका निर्यात होता है, लेकिन इस बार उत्पादन घटने से निर्यात प्रभावित होने की आशंका है।
बेमौसम बारिश से गेहूं, जीरा और अन्य रबी फसलों को भी नुकसान हुआ है। किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो रहा है और वे राहत की उम्मीद कर रहे हैं। संग्रह पर निर्भर परिवारों की आय घटी है और महिलाओं का समय जंगलों में अधिक बीत रहा है। खेजड़ी और केर के पेड़ों को संरक्षण नहीं मिलने से भविष्य में इस पारंपरिक धरोहर पर संकट की आशंका जताई जा रही है।
Updated on:
10 Apr 2026 02:01 pm
Published on:
10 Apr 2026 02:01 pm
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