4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

बकरियों को जानलेवा निमोनिया से बचाएगा टीका

-पहली बार अभियान के रूप में दस लाख भेड़-बकरियों का टीकाकरण -15 फरवरी तक चलेगा अभियान
2 min read
Google source verification
Vaccine will save goats from deadly pneumonia

बकरियों को जानलेवा निमोनिया से बचाएगा टीका

पाली। जिले के भेड़पालकों के लिए खुशखबर है। प्रदेश में भेड़-बकरियों को निमोनिया से बचाने के लिए पहली बार पशुपालन विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है। पीपीआर-सीपी अभियान के तहत जिले में 10 लाख 17 हजार 400 टीके लगाए जाएंगे। एक बार टीकाकरण होने से सम्बंधित पशु में निमोनिया के प्रति तीन साल तक प्रतिरोधक क्षमता बनी रहेगी।
इसके तहत जिले में पशुपालन विभाग के करीब दो से अधिक पशुधन सहायक व अधिकारी गांवों व अस्पतालों में टीकाकरण कर रहे हैं। इसके लिए रेवड़ रखने वाले पशुपालकों से सम्पर्क किया जा रहा है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से सौ दिवसीय कार्ययोजना के तहत शुरू इस अभियान में अब तक जिले में 5 लाख 38 हजार 442 भेड़-बकरियों का टीकाकरण किया जा चुका है। खास बात ये है कि इसके तहत पशुपालन विभाग के कर्मचारी पशुपालकों के घर पहुंचकर टीके लगा रहे हैं।

यह है लक्षण
पीपीआर रोग भेड़ बकरियों में पाया जाता है। इस बीमारी के अंतर्गत भेड़- बकरियों के मुंह में छाले व नाक में घाव हो जाने से कारण मुंह से खून निकलने लगता है। पशुओं में तेज बुखार, सांस का फूलना, निमोरिया, खूनी दस्त आदि लक्षण पाए जाते है। इससे ग्रसित पशुओं में मृत्युदर पांच प्रतिशत तक रहती है।

सात दिनों के भीतर हो जाती है मौत
पीपीआर नामक रोग से भेड़-बकरियों की 4 से 7 दिनों के भीतर मौत हो जाती है। यह बीमारी लगने पर भेड़ पालक संभल ही नहीं पाते है। देखते ही देखते रेवड़ के रेवड़ मौत के मुंह में समा जाते है। इस बीमारी से भेड़ पालकों को काफी ज्यादा नुकसान होता है। इस बीमारी में गर्भित मादा पशुओं में गर्भपात हो जाता है।
दिया है लक्ष्य
पीपीआर रोग के लिए पहली बार जिले में 10 लाख 17 हजार 400 टीके लगाने का लक्ष्य दिया गया है। अभी तक 5 लाख 38 हजार 442 टीके लगा दिए गए है। इसमें दस पशुओं तक दो रुपए शुल्क निर्धरित किया गया है।
डॉ. च्रकधारी गौतम, संयुक्त निदेशक, पशुपालन विभाग, पाली