
police preparing for security system for gaurav yatra
पाली. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 43 साल पुराने 20 सूत्री काय्र्रकम पर अब वसुंधरा सरकार की नजर तिरछी है। सरकार का कार्यकाल अगले छह माह में पूरा होने जा रहा है, लेकिन जिलों में अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई है। यही नहीं, आठ माह से प्रदेश बीसूका उपाध्यक्ष का पद भी खाली पड़ा है।
20 सूत्री कार्यक्रम पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में लॉन्च किया था। इसके बाद 1982, 1986, 2006 में इसमें बदलाव किए गए। यह कार्यक्रम गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के प्रति राज्यों की परफोर्मेंस की रेटिंग तय करता है। राज्य और जिला स्तर पर योजनाओं की समीक्षा के लिए समितियों के गठन का प्रावधान है। प्रदेश में एक उपाध्यक्ष होता है, जिसे केबिनेट या राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाता है। जिलों में प्रथम स्तरीय समिति में एक उपाध्यक्ष तथा 21 अन्य सदस्य मनोनीत होते हैं। इनका मनोनयन कार्मिक विभाग से होता है। इनमें सत्तापक्ष से जुड़े लोगों को ही शामिल होने का अवसर मिलता है। सामाजिक संस्थाओं और क्षेत्र विशेष में विशेषता रखने वाले कुछ लोग भी इसमें शामिल किए जाते हैं।
सत्ता पक्ष में निराशा
दो मायनों में बीसूका महत्वपूर्ण हैं। एक तो सरकारी योजनाओं की समीक्षा होती है, दूसरा राजनीतिक क्षेत्र के लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता है। जिस किसी पार्टी की सरकार होती है, उसके पदाधिकारी और कार्यकर्ता समितियों में शामिल होने का ख्वाब संजोते हैं। प्रदेश की भाजपा सरकार के चार साल पूरे होने के बावजूद राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई। ऐसे में सत्ता पक्ष से जुड़े कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर निराशा का माहौल है। भाजपा नेता दिगम्बरसिंह को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन 27 अक्टूबर 2017 को उनका देहांत होने के बाद से ही यह पद खाली है। जिलों में इस बार समितियों को गठन ही नहीं किया।
ये हैं 20 कार्यक्रम
गरीबी हटाओ, जन शक्ति, किसान मित्र, श्रमिक कल्याण, खाद्य सुरक्षा, सबके लिए आवास, शुद्ध पेयजल, जन जन का स्वास्थ्य, सबके लिए शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक एवं अन्य पिछड़े वर्ग का कल्याण, महिला कल्याण, बाल कल्याण, युवा विकास, बस्ती सुधार, पर्यावरण संरक्षण एवं वन वृद्धि, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण सडक़, ग्रामीण ऊर्जा, पिछड़ा क्षेत्र विकास, ई-शासन
Published on:
06 Jul 2018 02:16 pm
