
पाली। शहर के सूरजपोल स्थित श्रीयादे माता मंदिर पर प्रजापति महासेना के तत्वावधान में दीपोत्सव मनाया गया। प्रजापत महासेना के अध्यक्ष दिनेश वरांदणा ने बताया कि दीपावली के उपलक्ष्य में मंदिर पर 1001 दीपक जलाकर पूरे मंदिर को रोशन किया गया। इस दौरान आतिशबाजी भी की गई। कार्यक्रम में सुनील हाटवा, मोहन कपूपरा, धनराज उठेलिया, चम्पालाल कुण्डलवाल, महेन्द्र जाजपरा, अतिमराज, गौतम सहित कई जने उपस्थित रहे।
हालात के चाक पर दीया उदास
बांझाकुड़ी। आधुनिकता के दौर में दीपावली अब पुराने रीति रिवाजों से दूर होती जा रही है। मिट्टी के दीपक की जगमगाहट अब एलइडी लाइटों एवं मोमबत्तियां के आगे फीकी पडऩे लगी है। लोगों ने माटी के दीपक के बजाय मोमबत्तियों को महत्व देना शुरू कर दिया है। रंग बिरंगी रोशनी रोशनी का असर मिट्टी दीपक बनाने वाले परिवारों पर देखने को मिल रहा है।
दीपक से दूसरों का घर रोशन करने वाले कु हारों की उम्मीद पर पानी फिरने लगा है। पहले मिट्टी के दीए जलाने की पर परा थी, लेकिन अब दीपक केवल शगुन के रूप में लिए जाते हैं। हालात को देखते हुए घूमते चाक पर दीपक सिकोरे व अन्य बर्तन बनाने वाले कुम्हार अपने बच्चों को इस हुनर से दूर रख रहे हैं। गांव के भंवराराम कुमावत ने कहा कि बच्चों को यह हुनर सिखा कर उनके भविष्य से खिलवाड़ नहीं करना चाहते हैं। पहले जहां एक परिवार 100 से 300 दीपक खरीदता था, आज केवल 21 दीए जलाकर बाकी रंगीन रोशनी से घर सजा दिया जाता है। दीपक बनाने के लिए चिकनी मिट्टी मिलनी भी मुश्किल हो गई है। मिट्टी में कंकर ज्यादा होने से अब बढिय़ा दीए बनते भी नहीं है।
कुमावत ने बताया कि लगातार 13-14 घंटे प्रतिदिन मेहनत करने के बाद भी मजदूरी नहीं निकल पाती। हालात यह है कि मिट्टी के बर्तन अब केवल किताबों में चित्रों के रूप में ही दिखेंगे। शुद्ध घी और तेल से पर्यावरण भी शुद्ध होता है, लेकिन सहज उपलब्धता एवं आसानी से घर को जगमगाने के कारण चाइनीज लाइट के प्रति लोगों का रुझान ज्यादा है।