
महेश चंदेल
धनला। पाली जिले के धनला कस्बा स्थित सच्चियाय माताजी (ओसिया माताजी) के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालु माताजी के दर्शन के बाद यहां बगीचे को निहारते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। 2001 में मंदिर स्थापना के बाद आज तक प्रतिवर्ष होने वाले वृक्षारोपण से मंदिर परिसर में 400 से अधिक पेड़-पौधे तथा रुद्राक्ष के दुलर्भ वृक्ष सच्चियाय माताजी के बगीचे की शोभा बढा रहे है। मंदिर कर्मियों द्वारा समय-समय पर विशेषज्ञों की सलाह से इन पेड़-पौधों की नियमित सार-संभाल की जा रही है।
55 प्रकार की किस्म के पेड़-पौधे
बगीचे में 55 से अधिक किस्म के पेड़ पौधे लगे हैं। इन प्रजातियों के नाम मंदिर प्रशासन ने साइन बोर्ड पर चस्पा कर रखे हैं। यहां दुर्लभ रुद्राक्ष व कल्प वृक्ष के जोड़े दर्शनार्थियों के आकर्षण का केंद्र बनते हैं। बड़, पीपल, हूमण, मीठा नीम, बजुरा, सीताफल, आम, महुआ, तुलसी, श्याम तुलसी, अंजीर, सागवान, पपीता, गुन्दा, जामुन, अशोक सहित विभिन्न प्रजातियों के पेड-पौधे हैं।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बगीचे में विभिन्न प्रजातियों के पेड़-पौधे हैं। इनके नाम बोर्ड पर लिखवाए गए हैं, ताकि जन सामान्य को प्रजातियों की जानकारी रहे। दर्शनार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है। -मोहनलाल पारेख, अध्यक्ष, राज राजेश्वरी सच्चियाय माताजी मंदिर ट्रस्ट, धनला