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अनूठी पहल : किसान बोला- नहीं चाहिए फसल, पूरा गांव है मेरा परिवार, इस लिए मीठे पानी से बुझाएंगे सबकी प्यास

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पाली

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Suresh Hemnani

Apr 03, 2019

Water Supply Department will supply water from private well

अनूठी पहल : किसान बोला- नहीं चाहिए फसल, पूरा गांव है मेरा परिवार, इस लिए मीठे पानी से बुझाएंगे सबकी प्यास

- जलदाय विभाग निजी कुएं से जल्द शुरू करेगा जलापूर्ति
- चामुंडेरी गांव के किसान सुमेरसिंह ने निजी कुएं का पानी देने पर जताई सहमति

पाली/नाना। गर्मी का ऐसा दौर, जहां गांव-कस्बे पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में पाली जिले के चामुंडेरी गांव के एक किसान ने ग्रामीणों की प्यास बुझाने का बीड़ा उठाया है। खास बात ये है कि ये वो पानी है, जिससे फसलों की सिंचाई की जानी थी। अब जलदाय विभाग के अधिकारी इस किसान के निजी कुएं से वैकल्पिक व्यवस्था कर जलापूर्ति की तैयारी में जुट गए हैं।

दरअसल, पिछली बारिश की ऋतु में आशा से कम बारिश होने से गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहरा गया है। जिले के मारवाड़-गोडवाड़ के कई गांवों में लोग दूर-दूर से पानी का प्रबंध करने को मजबूर है। कुछ ऐसे ही हालात बाली तहसील के चामुंडेरी गांव में पैदा हो गए हैँ। यहां पानी की किल्लत कुछ ज्यादा हो हो गई। इस पर ग्रामीणों की व्यथा लेकर सरपंच जसवंत राज मेवाड़ा ने जलदाय विभाग के अधिकािरयों के साथ ही प्रशासनिक अधिकारियों से भी सम्पर्क साधा। लेकिन, समाधान नहीं हो पाया।

सरकारी कुओं में नाम मात्र का पानी
जब ग्रामीणों की व्यथा सुनी तो जलदाय विभाग के एक्सइएन के सी सिंघानिया, एइएन ऋतुराज सिंह और जेइएन वीरेंद्र सिंह हालात का जायजा लेने गांव पहुंचे। उन्होंने जलदाय विभाग के सरकारी कुओं का जायजा लिया, लेकिन कुओं में पानी की आवक नाम मात्र की ही दिखा। इस पर सरपंच मेवाड़ा की मौजूदगी में एक कृषि कुआं मालिक सुमेर सिंह सोढ़ा आगे आए। उन्होंने अपने निजी कुएं का पानी गर्मी के मौसम में गांव के ग्रामीणों की जलापूर्ति के लिए देने के लिए हामी भरी। इससे जलदाय विभाग के अधिकारियों को भी राहत मिली। अब वे निजी कुएं से वैकल्पिक व्यवस्था कर गांव में जलापूर्ति की तैयारी में जुट गए हैं। कुआं मालिक की इस घोषणा की अधिकारियों के साथ ही सरपंच व ग्रामीणों ने भी तारीफ की।

गांव भी तो मेरा ही परिवार
बकौल सुमेरसिंह सोढ़ा, ‘ये पूरा गांव भी तो मेरे परिवार के जैसा ही है। ईश्वर ने मेरे कुएं में मीठा पेयजल दिया है, जो किसी पुण्य की ही देन है। मेरी फसल से ज्यादा अब इस कुएं का पानी इस गर्मी में ग्रामीणों की प्यास बुझाएगा तो इससे बडा सौभाग्य मेरा हो ही नहीं सकता।’