
Lucky son is the one who obeys parents
पवई. नगर के जगदीश स्वामी मंदिर प्रांगण में पांच दिनी श्रीराम चरित्र मानस सम्मेलन के आखरी दिन कथा व्यास सुलेखा रामायणी ने भगवान श्रीराम के वनवास की कथा का वर्णन किया। सुलेखा रामायणी ने कहा, श्रीराम को वशिष्ठ जी द्वारा संदेश प्राप्त हुआ कि कल आपको राज सिंहान पर जाना है, लेकिन पिता दसरथ ने 14 वर्ष वनवास दे दिया। फिर भी भगवान श्रीराम पिता के आदेश को सुन कर दुखी नहीं हुए, बल्कि अपने सोभाग्यशाली मानते है।
मोह-माया के चक्कर में ईश्वर की प्राप्ति संभव कैस
उन्होंने कहा भाग्यशाली पुत्र वही होता है जो अपने पिता की आज्ञा का पालन करे। समाज में बदलाव लाने के लिए श्रीराम कथा जरूरी है। वही संत रमेश दास महाराज ने सम्मेलन के आखरी दिन श्रोताओं को बताया, कथा तो सभी सुनते हैं पर जीवन को कोई नहीं उतारते। संसार की मोह-माया के चक्कर में उलझे हुए व्यक्ति को ईश्वर की प्राप्ति कैसे संभव है। पांच दिनों तक चले मानस सम्मेलन का समापन वृन्दावन धाम से पधारे संत किशोर जी महाराज के उपस्थित में हुआ। इस अवसर पर उनकी नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शिक्षा के साथ संस्कार होना जरूरी
जगदीश स्वामी मंदिर प्रांगण में सोमवार को सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को श्रीराम चरित्र मानस के माध्यम से सुलेखा रामायणी ने शिक्षा के साथ संस्कारों को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा, विद्यार्थी आज विद्यालयों में शिक्षा गृहण कर बड़े-बड़े पदों पर आसीन हो रहे हैं, लेकिन संस्कार का आभाव देखने को मिलता है। जिस बच्चे को मां जन्म देती है वही बड़ा होकर कहने लगता है कि मां आप नहीं जानती, पिता की बातों को अनसुना कर देते हैं। सुलेखा महात्मा गांधी के संबंध में बताया, वो भी रामचरित मानस पाठ का अध्ययन करते थे। छात्र जीवन में शिक्षा के साथ संस्कार श्रीराम चरित्र मानस का पाठ से ही प्राप्त हो सकते हैं।
Published on:
15 Oct 2019 07:08 pm
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