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8 साल की रेप पीड़िता ने 3 महीने तक तड़पने के बाद तोड़ा दम, घर से किडनैप कर किया गया था दुष्कर्म

Bihar News: बिहार के अररिया में दरिंदगी की शिकार 8 साल की मासूम ने 96 दिनों तक अस्पताल में मौत से जूझने के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। नवरात्र की नवमी की रात घर से किडनैप कर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 07, 2026

Gang rape

Gang rape (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Bihar News: बिहार के अररिया में करीब तीन महीने पहले 8 साल की बच्ची कुछ दरिंदों की दरिंदगी की शिकार हुई थी। वह 96 दिनों तक अस्पताल के बिस्तर पर मौत से लड़ती रही और आखिरकार असहनीय दर्द सहते हुए उसने दम तोड़ दिया। इस मासूम बच्ची ने मंगलवार शाम को पूर्णिया के GMCH में आखिरी सांस ली। यह घटना 2 अक्टूबर की रात को हुई थी, लेकिन अभी तक आरोपी पकड़े नहीं जा सके है।

क्या हुआ था उस रात?

यह घटना 2 अक्टूबर 2025 के रात की है। पूरा देश गांधी जयंती मना रहा था और गांव शारदीय नवरात्रि की नवमी के जोश में डूबा हुआ था। अररिया के सिकटी ब्लॉक के एक गांव में एक पुलिस चौकीदार ड्यूटी पर थे। उसकी पत्नी और दो मासूम बच्चे घर पर सो रहे थे। रात की खामोशी का फायदा उठाकर कुछ लोग घर में घुस गए और सोते समय 8 साल की मासूम बच्ची को किडनैप कर लिया।

बच्ची को अधमरी हालत में छोड़कर भागे थे आरोपी

मासूम बच्ची को उसके घर से कुछ दूरी पर बांस के झुरमुट में ले जाया गया, जहां उसके साथ बेरहमी की गई। दरिंदे उसे खून से लथपथ और अधमरी हालत में छोड़कर भाग गए। जब ​​बच्ची को होश आया, तो वह किसी तरह रेंगते हुए घर पहुंची और डर के मारे एक कंबल के नीचे छिप गई। जब उसके पिता काम से लौटे और घर की लाइट जलाई, तो देखा कि जिस बिस्तर पर बेटी सोई हुई थी, वो खून से सना हुआ था और उनकी प्यारी बेटी दर्द से कराह रही थी।

96 दिनों तक संघर्ष किया

बच्ची को तुरंत अररिया सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे पूर्णिया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां पिछले तीन महीनों (96 दिनों) से उसका इलाज चल रहा था। इस दौरान, उसे लगी गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण उसकी दो बड़ी सर्जरी भी हुई।

अस्पताल के बिस्तर पर लेटी मासूम बच्ची अक्सर अपने पिता से पूछती थी कि क्या डॉक्टर उसे बचा पाएंगे और क्या पुलिस उसे इंसाफ दिला पाएगी। लेकिन दुर्भाग्य से, न तो डॉक्टर उसकी जान बचा पाए और न ही पुलिस अब तक उसे इंसाफ दिला पाई है। 31 दिसंबर को आखिरी ऑपरेशन के बाद कुछ उम्मीद जगी थी, लेकिन इंफेक्शन फैलने के कारण मंगलवार की शाम उसने आखिरी सांस ली।

इस मामले में मृतक लड़की के पिता अभी भी अपनी बेटी के लिए न्याय की भीख मांग रहे हैं, जबकि वो खुद पुलिस विभाग में चौकीदार के पद पर कार्यरत हैं। घटना के तीन महीने बाद भी अररिया महिला पुलिस स्टेशन असली दोषियों की पहचान नहीं कर पाई है।

पुलिस पर लापरवाही का आरोप

परिवार का आरोप है कि शुरुआती जांच में पुलिस ने लापरवाही बरती। गांव के पांच संदिग्धों को जेल भेजा गया, लेकिन उनके DNA सैंपल और फोरेंसिक रिपोर्ट अभी तक नहीं आई हैं। परिवार का कहना है कि जब तक असली दोषियों का पता नहीं चलता, उनकी बेटी की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी। हैरानी की बात यह भी रही कि बच्ची की मौत के बाद पूर्णिया पुलिस ने तकनीकी कारणों और दूसरे जिले का मामला बताकर पोस्टमार्टम करने से मना कर दिया। मासूम लड़की का शव घंटों तक अस्पताल में पड़ा रहा। अररिया पुलिस के बाद ही पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई।

मामले में जांच जारी है - DSP

अररिया DSP (मुख्यालय) मनोज कुमार सिंह ने कहा कि लड़की के परिवार ने अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। लड़की के शव का पोस्टमार्टम हो चुका है और शव परिवार को सौंप दिया गया है। तकनीकी जांच जारी है और मामले को जल्द ही पूरी तरह से सुलझा लिया जाएगा।