22 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

318 लीटर शराब के साथ पकड़ाई थी गाड़ी, हाई कोर्ट ने 23 फीसदी कम कर दिया जुर्माना, जानिए क्या दिया तर्क

Bihar Excise Act: दरभंगा में 318 लीटर शराब के साथ जब्त की गई किराए की कार के मामले में पटना हाई कोर्ट ने गाड़ी के मालिक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने जुर्माने को 50 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया और अतिरिक्त 3 प्रतिशत चार्ज को गैर-कानूनी घोषित करके उसे रद्द कर दिया।

2 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Jan 06, 2026

Bihar News | पटना हाई कोर्ट

पटना हाई कोर्ट

Bihar Excise Act: पटना हाई कोर्ट ने बिहार में शराबबंदी कानून के तहत जब्त गाड़ियों को छुड़ाने के लिए लगाए जा रहे भारी जुर्माने पर एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। दरभंगा जिले में 318 लीटर विदेशी शराब के साथ जब्त एक किराए की गाड़ी के मामले में, हाई कोर्ट ने प्रशासन के आदेश में बदलाव करते हुए गाड़ी मालिक को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 50 प्रतिशत जुर्माने को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया और 3 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज को पूरी तरह से अवैध घोषित करते हुए उसे रद्द कर दिया।

क्या था पूरा मामला?

याचिकाकर्ता सिकंदर आजम द्वारा रेंट पर दी गई एक गाड़ी को दरभंगा जिले के बहेड़ा पुलिस स्टेशन इलाके से पुलिस ने जब्त किया था। आरोप था कि गाड़ी से लगभग 318 लीटर शराब बरामद हुई थी। इसके बाद, दरभंगा के डीएम ने बिहार निषेध और उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत गाड़ी को जब्त करने का आदेश दिया। यह भी कहा गया कि अगर गाड़ी मालिक गाड़ी छुड़ाना चाहता है, तो उसे गाड़ी की बीमा राशि का 50 प्रतिशत जुर्माना, साथ ही 3 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज जमा करना होगा। इस आदेश को उत्पाद शुल्क आयुक्त ने अपील में भी बरकरार रखा था।

हाई कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?

याचिकाकर्ता के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि सिकंदर आजम इस मामले में आरोपी नहीं हैं। उन्होंने एक वैध वाहन लीज समझौते के तहत अपनी गाड़ी किराए पर दी थी। गाड़ी का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा था, इस पर मालिक का कोई सीधा नियंत्रण नहीं था। वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि 50 प्रतिशत जुर्माना बहुत ज्यादा, अनुचित और मनमाना है। इसके अलावा, कानून में जुर्माने के ऊपर 3 प्रतिशत अतिरिक्त चार्ज लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।

राज्य सरकार का तर्क

राज्य सरकार की तरफ से वकील ने तर्क दिया कि भले ही गाड़ी मालिक आरोपी न हो, लेकिन गाड़ी से बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई थी। ऐसे में 50 प्रतिशत जुर्माने को अनुचित नहीं माना जा सकता। हालांकि, राज्य ने यह भी स्वीकार किया कि पिछले कई मामलों में, हाई कोर्ट ने 30 प्रतिशत जुर्माने को उचित माना था।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस राजीव रंजन प्रसाद और जस्टिस सौरेंद्र पांडे की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता इस मामले में आरोपी नहीं है। गाड़ी किराए के एग्रीमेंट के तहत दी गई थी। 50 प्रतिशत पेनल्टी बहुत ज्यादा है और इसे कम किया जाना चाहिए था। अपने पिछले फैसलों का हवाला देते हुए, कोर्ट ने पेनल्टी को घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया।

हाई कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि पेनल्टी पर अतिरिक्त 3% चार्ज लगाने का कोई कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने इसे बिना कानूनी मंजूरी के बताया और इस हिस्से को पूरी तरह रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद अब वाहन मालिक को गाड़ी छुड़ाने के लिए 53 प्रतिशत नहीं, बल्कि सिर्फ 30 प्रतिशत बीमित मूल्य ही देना होगा। यानी करीब 23 प्रतिशत की सीधी राहत मिली है।