
विधानसभा परिसर में प्रदर्शन करते AIMIM विधायक
Bihar Assembly: AIMIM के विधायकों ने गुरुवार को बिहार विधानसभा परिसर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पोस्टर और बैनर लेकर विधायकों ने नीतीश सरकार पर महिलाओं, अल्पसंख्यकों और व्यापारियों की सुरक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया। विरोध प्रदर्शन के दौरान, बैनरों पर अथर हुसैन और हिना खातून के मामलों का ज़िक्र किया गया और सरकार से जवाब मांगा गया। पोस्टरों पर "मॉब लिंचिंग बंद करो," "कानून का राज स्थापित करो," और "हत्यारों को फांसी दो" जैसे नारे भी लिखे थे।
इस दौरान, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल इमान ने कहा कि बिहार में हालात इतने खराब हो गए हैं कि "गुंडों और बलात्कारियों ने सरकार का अपहरण कर लिया है।" उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में न तो महिलाएं, न व्यापारी और न ही अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित हैं। अख्तरुल इमान ने कहा कि NEET छात्रा केस में अब सच्चाई सामने आ गई है, फिर भी सरकार जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने सवाल किया, "'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' का नारा कहां गया?"
विधायक ने कई घटनाओं का जिक्र करते हुए सरकार पर हमला बोला। उन्होंने हिना खातून के कथित गैंगरेप, कपड़ा व्यापारी अथर हुसैन की मॉब लिंचिंग, भरवारा के कय्यूम की हत्या, बेगूसराय में धमकी मिलने के बाद कपड़ा व्यापारी शहजादा की हत्या, भाषा के नाम पर नूरशेद नाम के एक युवक की हत्या और गुलाबबाग में व्यवसायी सूरज बिहारी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या का जिक्र किया। उनके अनुसार, इन मामलों में या तो पुलिस की लापरवाही साफ दिख रही थी, या कार्रवाई बहुत धीमी थी।
अख्तरुल ईमान ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय में भय का माहौल है और सवाल यह है कि क्या उन्हें इस राज्य में सुरक्षित जीवन का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कहीं न कहीं अपराधियों को संरक्षण दे रही है और पीड़ितों की आवाज दबाई जा रही है।
इस सत्र के दौरान, विधानसभा में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। टाल क्षेत्र में जलभराव को लेकर RJD विधायक के एक सवाल का जवाब देते हुए जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि हरौहर नदी के जरिए ज्यादा पानी को गंगा नदी में निकालने का इंतजाम किया जा रहा है और लखीसराय के बालगुदर में एक फ्लडगेट बनाया जा रहा है।
विपक्ष ने मक्का खरीद को लेकर मंत्री लेसी सिंह के जवाब पर भी आपत्ति जताई। जोकीहाट के विधायक ने आरोप लगाया कि PACS (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटीज़) के जरिए खरीद आदेश के बारे में सदन में गुमराह करने वाला जवाब दिया गया है। अख्तरुल ईमान ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) इसलिए तय किया जाता है ताकि बाजार में मांग न होने पर भी किसानों को सही कीमत मिल सके। स्पीकर ने मंत्री को सदस्यों के सुझावों पर विचार करने और उसी के अनुसार फैसला लेने की सलाह दी।
Updated on:
05 Feb 2026 02:23 pm
Published on:
05 Feb 2026 02:23 pm
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