
भागलपुर में समृद्धि यात्रा के दौरान नीतीश कुमार, सम्राट चौधरी, विजय चौधरी, दिलीप जायसवाल और अन्य
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अपनी समृद्धि यात्रा के चौथे चरण के तहत भागलपुर के जगदीशपुर पहुंचे थे। बैजानी पंचायत के स्कूल मैदान में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में मंच पर भारी भीड़ और उत्साह था। लेकिन इस सरकारी कार्यक्रम में उस वक्त सन्नाटा और फिर फुसफुसाहट शुरू हो गई, जब कार्यक्रम का संचालन कर रही एंकर ने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को 'मुख्यमंत्री' कहकर संबोधित कर दिया। जिसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या यह एंकर की जुबान फिसलने की एक मामूली घटना थी, या फिर सचमुच कुछ ऐसा होने वाला है?
जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मंच पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री विजय चौधरी, मंत्री दिलीप जायसवाल समेत कई बड़े नेता मौजूद थे। एक-एक कर सभी नेताओं का संबोधन हो रहा था। मंत्री विजय चौधरी अपना भाषण पूरा कर चुके थे। एंकर को अब उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को आमंत्रित करना था। एंकर ने पहले तो सही कहा, 'अब मैं बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी का स्वागत करती हूं।'
लेकिन जैसे ही सम्राट चौधरी अपनी कुर्सी से उठकर माइक की तरफ बढ़े, एंकर ने दोबारा जोश में कहा, 'मुख्यमंत्री जी का जोरदार तालियों के साथ स्वागत कीजिए।' इस एक शब्द ने मंच पर मौजूद नेताओं और सामने बैठी जनता को चौंका दिया। हालांकि, सम्राट चौधरी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, उन्होंने बिना किसी झिझक के हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया और माइक की तरफ बढ़े। इसके बाद सम्राट चौधरी ने अपना भाषण सामान्य ढंग से शुरू किया और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जमकर तारीफ की। लेकिन एंकर की यह गलती अब बिहार की सियासत में सच की तरह देखी जा रही है।
एंकर की गलती से ज्यादा चर्चा नीतीश कुमार के व्यवहार की हो रही है। जब नीतीश कुमार ने अपना संबोधन समाप्त किया, तो वे मंच पर मौजूद सम्राट चौधरी के पास गए। उन्होंने बड़े प्रेम से सम्राट के कंधे पर हाथ रखा और उन्हें आगे कर जनता को प्रणाम करवाया। सम्राट ने तुरंत दोनों हाथ जोड़कर जनता का अभिवादन किया।
राजनीतिक गलियारों में इसे नीतीश कुमार द्वारा अपने 'उत्तराधिकारी' को आशीर्वाद देने के रूप में देखा जा रहा है। राज्य सभा चुनाव जीतने के बाद नीतीश कुमार का यह व्यवहार बताता है कि वे सम्राट चौधरी को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार कर रहे हैं।
बिहार में नए मुख्यमंत्री की रेस में सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रबल होने के पीछे कई समीकरण हैं। इसका सबसे बड़ा कारण लव-कुश समीकरण माना जा रहा है। नीतीश (कुर्मी) और सम्राट (कोइरी) मिलकर बिहार का सबसे मजबूत गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक बनाते हैं। भाजपा सम्राट को आगे कर इस बड़े वोट बैंक को अपने पाले में रखना चाहती है। इसके अलावा सम्राट चौधरी के पास संगठन और सरकार चलाने का लंबा अनुभव है। वे राजद के खिलाफ भाजपा का सबसे मुखर चेहरा रहे हैं।
नीतीश कुमार अब राज्य सभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं और अप्रैल में वे शपथ ले सकते हैं। चर्चा है कि इस्तीफा देने से पहले वे सत्ता की चाबी भाजपा को सौंपेंगे। भागलपुर के मंच पर जो केमिस्ट्री नीतीश और सम्राट के बीच दिखी, उसने इस बात पर मुहर लगा दी है कि एनडीए के भीतर अगले चेहरे को लेकर सहमति बन चुकी है।
Published on:
17 Mar 2026 05:37 pm
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