10 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

LSE पर कंपनी लिस्ट कराने वाले पहले भारतीय थे अनिल अग्रवाल, पटना के ‘कबाड़’ वाले लड़के से मेटल किंग बनने की कहानी…

Anil Agarwal:लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) पर अपनी कंपनी लिस्ट कराने वाले पहले भारतीय अग्रवाल अपने पिता की मदद करने के लिए साइकिल से पटना की गलियों में कबाड़ डीलरों के पास जाया करते थे। आज वे करोड़ रुपये की नेटवर्थ के साथ बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

4 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Jan 08, 2026

vedanta chairman anil agarwal

वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल (Photo- Vedanta Limited)

Anil Agarwal: दुनिया के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित स्टॉक मार्केट में से एक, लंदन स्टॉक एक्सचेंज (LSE) में अपनी कंपनी लिस्ट करना किसी भी बिजनेसमैन के लिए माउंट एवरेस्ट फतह करने जैसा है। लेकिन 2003 में, जब ग्लोबल मार्केट में भारतीय कंपनियों की लगभग कोई मौजूदगी नहीं थी, तब बिहार की मिट्टी से निकले एक व्यक्ति ने इस सपने को सच कर दिखाया था। वह शख्स थे अनिल अग्रवाल।

आज, जब अनिल अग्रवाल अपनी सफलता के शिखर पर हैं, तो किस्मत ने उन्हें सबसे गहरा झटका दिया है। उनके इकलौते बेटे, अग्निवेश अग्रवाल का 49 साल की उम्र में निधन हो गया। अमेरिका में स्कीइंग दुर्घटना के बाद इलाज के दौरान दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई। 'मेटल किंग' के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल इस सदमे से टूट गए हैं, उन्होंने सोशल मिडिया पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।

2003: जब पटना के एक बेटे ने लंदन में इतिहास रचा

यह बात है साल 2003 की। अनिल अग्रवाल अपनी कंपनी, वेदांता को LSE में लिस्ट कराने के लिए दृढ़ थे। उस समय, उन्हें न तो अच्छी इंग्लिश बोलनी आती थी और न ही कॉर्पोरेट जगत का सलीका पता था। लेकिन, फिर भी वो लंदन पहुंचे और अपनी टूटी-फूटी इंग्लिश में, उन्होंने विदेशी निवेशकों को भारत की खनिज संपदा और अपनी क्षमताओं के बारे में समझाया। उन्होंने लगभग 20-30 हजार करोड़ रुपये जुटाए, जो उस समय किसी भी भारतीय के लिए अकल्पनीय रकम थी।

सालों बाद भी अनिल अग्रवाल अक्सर वो पल याद करके इमोशनल हो जाते हैं, जब वह लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ उतरे थे। उस वक्त वो ज्यादा सामान पैक कर नहीं ले जा पाए थे, लेकिन अपनी मां के पराठे और बाबूजी के शॉल को, उनके आशीर्वाद के रूप में ले जाने में वो कामयाब रहे थे।

पटना की सड़कों से 'मेटल किंग' का सफर

अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में बिहार की राजधानी पटना में एक मारवाड़ी परिवार में हुआ था। उनके पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्युमिनियम कंडक्टर का छोटा सा बिजनेस करते थे। अनिल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पटना के मिलर हाई स्कूल से की। लेकिन 15 साल की उम्र में, उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और अपने पिता की मदद करने के लिए साइकिल से कबाड़ डीलरों के पास जाने लगे।

19 साल की उम्र में, वह सिर्फ एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर लेकर सपनों के शहर मुंबई पहुंचे। पहले 10 साल संघर्षों से भरे थे। उन्होंने 9 अलग-अलग बिजनेस शुरू किए, जो सभी फेल हो गए। वह कहते हैं कि वह सालों तक डिप्रेशन में थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 1976 में उन्होंने 'शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी' खरीदी और यहीं से वेदांता रिसोर्सेज की नींव रखी गई।

भारत सरकार के फैसले से अचानक बदली किस्मत

साल 2001 और 2002 अनिल अग्रवाल के करियर में टर्निंग पॉइंट थे। भारत सरकार ने पब्लिक सेक्टर कंपनियों में विनिवेश शुरू कर दिया था। एक बड़ा रिस्क लेते हुए, अनिल ने BALCO में 51% और हिंदुस्तान जिंक में 65% हिस्सेदारी खरीदी। उस समय, ये कंपनियां घाटे में चल रही थीं और लोग उनकी आलोचना कर रहे थे। लेकिन अनिल की रणनीतिक समझ ने उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी माइनिंग कंपनियों में से एक में बदल दिया। आज, वेदांता एल्युमिनियम, जिंक और चांदी के प्रोडक्शन में एक ग्लोबल लीडर है।

बेटे अग्निवेश की मौत से टूटे अनिल अग्रवाल

अनिल अग्रवाल की सफलता में उनकी पत्नी किरण अग्रवाल और उनके बच्चों, बेटी प्रिया और बेटे अग्निवेश का बहुत बड़ा हाथ था। लेकिन, 7 जनवरी 2026 को अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की स्कीइंग दुर्घटना के बाद न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई। अनिल अग्रवाल ने यह जानकारी एक सोशल मीडिया पोस्ट में शेयर की। 3 जून, 1976 को पटना में जन्मे अग्निवेश एक कुशल एथलीट और लीडर थे। उन्होंने हिंदुस्तान जिंक के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और फुजैराह गोल्ड के हेड के तौर पर अपनी काबिलियत साबित की थी।

उनकी शादी श्री सीमेंट के हरि मोहन बांगुर की बेटी पूजा बांगुर से हुई थी, जो उस समय की सबसे महंगी शादियों में से एक थी। अग्निवेश की असमय मौत ने पूरे अग्रवाल परिवार को तोड़ दिया है। अनिल अग्रवाल ने खुद सोशल मीडिया पर लिखा, "अग्निवेश सिर्फ मेरा बेटा नहीं था, वह मेरा गौरव और मेरी दुनिया था।"

Anil Agarwal Net Worth: बिहार के सबसे आमिर व्यक्ति

अनिल अग्रवाल बिहार के सबसे आमिर व्यक्ति हैं। फोर्ब्स के अनुसार, अगस्त 2025 तक अनिल अग्रवाल की नेट वर्थ लगभग 3.66 लाख करोड़ रुओए ($4.2 बिलियन) होने का अनुमान है। उनकी इनकम के मुख्य सोर्स में वेदांता डिविडेंड (2024 में 44,000 करोड़ रुपये), शेयर बिक्री, बॉन्ड, रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट शामिल हैं।

अनिल अग्रवाल का करियर

  • 1970 के मध्य: मुंबई में स्क्रैप मेटल का व्यापार शुरू किया।
  • 1976: शमशेर स्टर्लिंग कॉर्पोरेशन का अधिग्रहण किया।
  • 1986: स्टर्लाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना, जेली फिल्ड केबल्स उत्पादन के लिए।
  • 1993: भारत में निजी कॉपर स्मेल्टिंग की शुरुआत स्टर्लाइट के साथ।
  • 2001: सरकारी BALCO का अधिग्रहण।
  • 2002: हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का सरकारी अधिग्रहण।
  • 2003: लंदन में वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी की स्थापना।
  • अंतरराष्ट्रीय विस्तार: जाम्बिया, दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में अधिग्रहण।
  • 2011: कैर्न इंडिया का अधिग्रहण, तेल-गैस क्षेत्र में मजबूती।
  • 2022: गुजरात में फॉक्सकॉन के साथ सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले वेंचर्स लॉन्च।

भारत में अनिल अग्रवाल के निवेश

  • ओडिशा में 80,000 करोड़ रुपये: एल्युमीनियम, फेरोक्रोम और माइनिंग विस्तार के लिए।
  • 25,000 करोड़ रुपये: ओडिशा प्रोजेक्ट विस्तार के लिए।
  • 1.54 लाख करोड़ रुपये: फॉक्सकॉन के साथ गुजरात में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले प्लांट्स।
  • ओडिशा जीडीपी में योगदान: वेदांता की औद्योगिक गतिविधियों से लगभग 4%।

अनिल अग्रवाल से जुड़े विवाद

  • 2004: तमिलनाडु में आर्सेनिक वेस्ट डंपिंग का आरोप।
  • 2005: ओडिशा में आदिवासी समुदायों के जबरन विस्थापन के आरोप।
  • जाम्बिया: काफुए नदी में खतरनाक वेस्ट प्रदूषण पर मुकदमे।
  • 2018: थूथुकुदी विरोध प्रदर्शन, स्मेल्टर विस्तार पर झड़प।