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सालगिरह का किया इंतजार… और फिर पत्नी के कर दिए 12 टुकड़े; बेटे की गवाही से खुला राज, कोर्ट ने दी फांसी की सजा

Bihar News: अरवल में रिटायर्ड शिक्षक बीरबल साहू को अपनी पत्नी की नृशंस हत्या के लिए फांसी की सजा सुनाई गई है। आरोपी ने अपनी 57वीं शादी की सालगिरह के दिन पत्नी को 12 टुकड़ों में काट डाला था।
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पटना

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Anand Shekhar

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Updated: 25 Feb 2026, 1:33 PM IST

Death penalty for three criminals in rape case of foreign woman

सांदर्भिक फोटो।

Bihar News: बिहार के अरवल जिले के एक खौफनाक मर्डर केस में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश रवि रंजन मिश्रा की कोर्ट ने महेंदिया थाना इलाके के जमुहारी के रहने वाले बीरबल साहू को अपनी पत्नी सुमंती सिन्हा की बेरहमी से हत्या करने का दोषी ठहराया। कोर्ट ने इस मामले को "रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर" मानते हुए दोषी पति को BNS (भारतीय न्याय संहिता) के सेक्शन 103(1) के तहत मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई। बताया जा रहा है कि अरवल जिले में यह मृत्युदंड की पहली सजा है, जिसके बाद पूरे इलाके में फैसले की चर्चा तेज है।

सालगिरह के दिन ही हत्या

इस हत्याकांड की सबसे खौफनाक बात इसकी प्लानिंग थी। दोषी बीरबल साहू शिक्षक की नौकरी में था। उसने कोर्ट और पुलिस के सामने कबूल किया कि वह बहुत पहले ही अपनी पत्नी सुमंती सिन्हा का मर्डर करना चाहता था, लेकिन उसे डर था कि अगर नौकरी करते हुए पकड़ा गया तो उसकी पेंशन और इज्जत चली जाएगी। हत्यारे पति ने अपने रिटायरमेंट तक इंतजार किया और फिर मर्डर के लिए 22 जुलाई, 2024 का दिन चुना। यह उनकी शादी की 57वीं सालगिरह थी। जिस दिन घर में उत्सव होना चाहिए था, उसी दिन बीरबल ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं।

पत्नी के किए 12 टुकड़े

एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर बिंदु भूषण प्रसाद के मुताबिक, बीरबल ने नाजायज रिश्ते के शक में अपनी पत्नी पर धारदार हथियार से हमला किया। उसने न सिर्फ उसका मर्डर किया, बल्कि उसकी पहचान मिटाने के लिए उसके शरीर के 12 टुकड़े भी कर दिए। इसे अरवल ज़िले के इतिहास में अपनी तरह का पहला और सबसे बेरहम केस बताया जा रहा है।

बेटे की गवाही ने पिता को पहुंचाया फंदे तक

इस केस में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट तब आया जब उसका अपना खून उसके कातिल पिता के खिलाफ हो गया। बीरबल के बेटे राज कुमार सिंह ने महेंदिया पुलिस स्टेशन में अपने पिता के खिलाफ FIR दर्ज कराई। कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुल नौ गवाहों ने गवाही दी, लेकिन बेटे की गवाही ने सरकारी वकील का केस इतना मजबूत कर दिया कि कोर्ट ने सर्वोच्च दंड सुनाने में कोई देरी नहीं की।

कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को बहुत गंभीर माना और आरोपी को मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने कहा कि यह जुर्म सबसे रेयर कैटेगरी का है और इसके लिए सबसे कड़ी सजा की जरूरत है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में हत्या के मामलों में मौत की सज़ा या उम्रकैद का प्रावधान है। कोर्ट ने हालात और जुर्म की क्रूरता को देखते हुए मौत की सजा को सही माना।

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