
बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी फोटो-Dr. Ashok Choudhary FB
Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले में आरोपी तत्कालीन जगदीशपुर DSP राजेश कुमार शर्मा को मद्य निषेध विभाग में नई पोस्टिंग दी गई है। इस फैसले के बाद बिहार का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर दिखावटी कार्रवाई करने का आरोप लगाया। जिसके बाद अब बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री और जदयू नेता अशोक चौधरी ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए इस ट्रांसफर के पीछे के प्रशासनिक और कानूनी कारणों को स्पष्ट किया।
आरोपी पुलिस अधिकारी को निलंबित करने या वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखने के बजाय नई जिम्मेदारी सौंपने के सवाल पर मंत्री अशोक चौधरी ने स्पष्ट किया कि ऐसा किसी को बचाने के लिए नहीं, बल्कि कानूनी पेचीदगियों से बचने के लिए किया गया है। अशोक चौधरी ने कहा कि उन्हें फील्ड ड्यूटी से हटाकर मद्य निषेध विभाग में पदस्थापित किया गया है, क्योंकि अभी मामले की न्यायिक जांच चल रही है। अगर उन्हें वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखा जाता या सीधे निलंबित कर दिया जाता, तो इससे न्यायिक जांच की निष्पक्षता पर कानूनी असर पड़ सकता था।
मंत्री ने कानूनी पहलू बताते हुए कहा कि कल को वे (राजेश शर्मा) कोर्ट में जाकर यह दलील दे सकते थे कि उनकी न्यायिक जांच अभी जारी है, लेकिन सरकार ने उन्हें जांच पूरी होने से पहले ही निलंबित कर दिया। इसका मतलब यह निकाला जाता कि सरकार ने उन्हें अदालत या जांच रिपोर्ट आने से पहले ही दोषी मान लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को बरकरार रखा है और वैसे भी, उन्हें मद्य निषेध विभाग में तैनात किया गया है, उससे खराब पोस्टिंग और क्या हो सकती है।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को नसीहत देते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि तेजस्वी यादव को नीतीश कुमार की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। चुनाव खत्म हो चुके हैं, और जनता ने तो उन्हें ठीक से नेता प्रतिपक्ष की हैसियत में रहने लायक संख्या भी नहीं दी है। उनकी सीटें इतनी घट गई हैं कि वे अब तकनीकी रूप से मुख्य विपक्षी दल भी नहीं बचे हैं। आखिर चुनाव में वे नीतीश कुमार के बारे में जनता के बीच जाकर क्या-क्या नहीं बोल रहे थे, जनता ने सब देख लिया है।
गौरतलब है कि भोजपुर के बिलौटी गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर के आरोप लगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर पटना हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच कमेटी का गठन किया गया है। इस बीच, मामले में नामजद तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को लाइन हाजिर करते हुए पुलिस मुख्यालय से अटैच कर दिया गया। हालांकि, इसके सात दिन बाद राजेश शर्मा को मद्दनिषेध विभाग में पोस्टिंग दे दी गई।
Published on:
02 Jul 2026 04:57 pm
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