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भरत तिवारी एनकाउंटर: आरोपी DSP की पोस्टिंग पर भड़कीं रोहिणी आचार्य, पूछा- किसे बचाने के लिए नहीं हो रही गिरफ्तारी?

Rohini Acharya on Bharat Tiwari Encounter: रोहिणी आचार्य ने भरत तिवारी एनकाउंटर केस में आरोपी DSP को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आरोपी अधिकारी की नई पोस्टिंग असल में उसे इनाम देने जैसा है। उन्होंने जांच की रफ्तार और भरत तिवारी के मोबाइल फोन की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए।
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पटना

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Anand Shekhar

Jul 02, 2026

rohini acharya on bharat tiwari encounter

SDPO की नई पोस्टिंग पर रोहिणी आचार्य ने उठाए सवाल

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले में 17 जून को हुए भरत भूषण तिवारी के कथित एनकाउंटर मामले को लेकर सियासी घमासान बढ़ता जा रहा है। अब RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले में आरोपी जगदीशपुर के तत्कालीन SDPO राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर सरकार पर हमला बोला है। रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर मामले की जांच को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

आरोपी पुलिस अधिकारी को नई जिम्मेदारी देना पुरस्कार जैसा

रोहिणी आचार्य ने भरत तिवारी की मौत के मामले में नामजद पुलिस अधिकारी की नई पोस्टिंग को सरकार का एक हैरान करने वाला फैसला बताया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "हत्या के नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को पुरस्कृत कर दिया सम्राट सरकार ने? जवईनिया गांव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले, भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले युवक भरत तिवारी की फर्जी पुलिसिया मुठभेड़ में की गयी हत्या के मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नयी जिम्मेदारी सौंपा जाना, पुरस्कृत किए जाने के समान है।"

रोहिणी ने आगे आरोप लगाया कि इस फैसले से पीड़ित परिवार और ग्रामीणों के उन आरोपों को बल मिलता है कि इस कथित फर्जी एनकाउंटर को शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की मौन सहमति या संरक्षण प्राप्त था।

रोहिणी आचार्य ने उठाए सवाल

  • रोहिणी आचार्य ने सवाल किया कि मृतक के परिवार द्वारा दर्ज FIR में लगभग आधा दर्जन पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाए जाने के बावजूद, उनमें से किसी को भी अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है?
  • आरोपियों से पूछताछ में ढिलाई क्यों बरती जा रही है? स्पेशल पुलिस टीम ने अब तक नामजद आरोपियों से कोई सघन पूछताछ क्यों नहीं की है?
  • जांच में पारदर्शिता की कमी क्यों है? जांच की गति इतनी धीमी क्यों है और पूरी प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है?
  • किसे बचाया जा रहा है? क्या आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी न होने और धीमी जांच के पीछे असली मकसद किसी 'बड़े रसूखदार व्यक्ति' को बचाना है, जिसने फर्जी एनकाउंटर का आदेश दिया था?
  • भरत तिवारी का मोबाइल फोन कहां है? लगभग दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी, पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन उसके परिवार को क्यों नहीं सौंपा है और फोन कहां गायब हो गया है?

न्यायिक जांच पर भी रोहिणी उठा चुकी हैं सवाल

रोहिणी आचार्य पहले ही भरत तिवारी फर्जी एनकाउंटर मामले की न्यायिक जांच के आदेश को जनता के आक्रोश को शांत करने की महज एक कोशिश बताकर खारिज कर चुकी हैं। रोहिणी का तर्क है कि सरकार द्वारा गठित न्यायिक जांच से तुरंत कोई स्पष्टता या खुलासा होने की संभावना नहीं है। न्यायिक जांच की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और इस वजह से इस हत्या के दोषियों का अपराध साबित करने में लंबा समय लगेगा।