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बिहार में महागठबंधन का ‘द एंड’? मनरेगा के बहाने कांग्रेस का ‘एकला चलो’ का दांव, RJD को छोड़ा पीछे

बिहार में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने को लेकर नया आंदोलन शुरू करने जा रही है। केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा का नाम बदलने को लेकर यह आंदोलन होगा।

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राजेश कुमार राम। फोटो- सोशल मीडिया कांग्रेस

बिहार में कांग्रेस मनरेगा का नाम बदलने के विरोध में 11 जनवरी से सड़क पर उतरेगी। इसको लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। लेकिन,कांग्रेस के इस आनंदोन से आरजेडी दूर रहेगी। जबकि झारखंड में कांग्रेस के इस आनंदोलन को झमुमो का भी समर्थन प्राप्त है। कांग्रेस बिहार में आरजेडी ही नहीं भाकपा, माकपा, भाकपा-माले और वीआईपी को भी छोड़कर सड़क पर उतरने का फैसला किया है। कांग्रेस के इस फैसले को लेकर इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या बिहार में कांग्रेस एकला चलो का फैसला कर लिया है।

कांग्रेस का ‘एकला चलो’ का फैसला

महगठबंधन के घटक दल आरजेडी, भाकपा, माकपा और माले को छोड़कर केवल अपने बैनर तले कांग्रेस मनरेगा के महत्वपूर्ण प्रावधानों को हटाने के खिलाफ सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 20 दिनों तक चलने वाले इस आंदोलन से कांग्रेस ‘एकला चलो’ का फैसला कर जमीन पर अपनी ताकत बढ़ाना चाह रही है। सीनियर पत्रकार लव कुमार कहते हैं कि बिहार में विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस बिहार में अपनी जमीन तैयार करने में लग गई है। जो सूचना है उसके अनुसार प्रदेश में महागठबंधन के खत्म होने की अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे शकील अहमद खां ने भी आरजेडी के साथ कांग्रेस के गठबंधन को घाटे का सौदा बता चुके हैं।

क्यों हुई आरजेडी से खटपट

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अगस्त-सितंबर 2025 में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का विरोध शुरू किया था। कांग्रेस के इस विरोध को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला था। 'वोटर अधिकार यात्रा' के बाद बिहार में विपक्षी दलों की एकता की मजबूती की चर्चा हो गई थी। लेकिन, यात्रा का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहीं भी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को विपक्ष के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर महागठबंधन में खटपट शुरू हो गया था। इसकी बानगी वोटर अधिकार यात्रा के बाद बिहार में तेजस्वी यादव की'बिहार अधिकार यात्रा' में दिखी। तेजस्वी यादव ने अपनी इस यात्रा से कांग्रेस से दूरी बना लिया था। इसके बाद से ही इसकी चर्चा शुरू हो गई थी कि चुनाव बाद महागठबंधन में दरार पड़ सकता है। चुनाव के बाद बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने महागठबंधन चुनाव तक ही था कह कर इसके संकेत दे दिए थे।

11 जनवरी को कांग्रेस नेता देंगे धरना

मनरेगा के महत्वपूर्ण प्रावधानों को खत्म कर वीबी-जी राम जी करने के खिलाफ कांग्रेस नेता 11 जनवरी को धरना देगी। कांग्रेस नेता सभी जिला मुख्यालयों में महात्मा गांधी या बीआर आंबेडकर की प्रतिमा के सामने दिनभर का उपवास रखेंगे। इसके बाद कांग्रेसी 12 से 29 जनवरी तक पंचायत स्तर पर अपना जनसंपर्क अभियान चलाएंगे। 30 जनवरी को शहरी इलाकों में वार्ड स्तर पर और ग्रामीण इलाकों में प्रखंड स्तर पर धरना देगी। 30 जनवरी को शहरी इलाकों में वार्ड स्तर पर और ग्रामीण इलाकों में प्रखंड स्तर पर धरना दिया जाएगा। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस मनरेगा वापसी की मांग को लेकर विधानसभा घेरने की योजना बनाई गई है। इसके अतिरिक्त प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से मनरेगा खत्म करने के विरोध में बड़ी रैली करने की भी तैयारी चल रही है।