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56 दिन में 20 एनकाउंटर 4 मौतें, भरत तिवारी केस के बाद थम गई बिहार पुलिस की गोली?

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद बिहार में पुलिस एनकाउंटर पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। 22 अप्रैल से 17 जून के बीच 20 एनकाउंटर हुए थे, जिनमें 4 लोगों की मौत हुई। 17 जून को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर हुए विवाद के चलते कार्रवाई थम गई।
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bharat tiwari Encounter case

भरत तिवारी (फोटो- bharat tiwari facebook)

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर के बाद बिहार पुलिस की एनकाउंटर कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के 15 अप्रैल 2026 को पदभार संभालने के बाद राज्य में लगातार एनकाउंटर की घटनाएं सामने आने लगी थीं। 22 अप्रैल से 17 जून के बीच बिहार पुलिस ने कुल 20 एनकाउंटर किए, जिनमें चार आरोपियों की मौत हुई। यानी 56 दिनों के दौरान औसतन हर तीसरे दिन एक एनकाउंटर हुआ। हालांकि, 17 जून को भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद से पुलिस की ओर से किसी नए एनकाउंटर की खबर सामने नहीं आई है।

अपराधियों का इलाज करेगी पुलिस

भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर से दो दिन पहले, 15 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था, "अपराधियों का या तो गया जी में पिंडदान होगा या फिर वे जेल में रहेंगे। इसके बिना बिहार अपराधमुक्त नहीं हो सकता। वैसे 80 से 90 प्रतिशत अपराधी बिहार छोड़कर भाग चुके हैं। अगर कोई बचा है तो उसका पता बताते रहिए, उसका इलाज बिहार पुलिस करती रहेगी।" मुख्यमंत्री की इस पोस्ट को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पुलिस की एनकाउंटर नीति को लेकर स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा गया।

भरत तिवारी के बाद एनकाउंटर पर ब्रेक

हालांकि, 17 जून को भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर के बाद शुरू हुए विवाद के चलते बिहार में पुलिसिया एनकाउंटर पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। मामले ने तूल पकड़ने पर तत्कालीन एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने पत्रकारों के सामने स्वीकार किया था कि एनकाउंटर को कभी भी उपलब्धि नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि भरत तिवारी मामले में पुलिस से लापरवाही हुई है।

इसके बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन किया। साथ ही, जगदीशपुर के डीएसपी, शाहपुर थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ शाहपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। इसके बावजूद इस मामले को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

वहीं, बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद ने भी भरत तिवारी के एनकाउंटर को 'मर्डर' बताया था। उनका कहना था कि जब तक कोई अपराधी कई जघन्य अपराधों में शामिल न हो, तब तक उसके एनकाउंटर के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। उन्होंने कानून के तहत कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया को ही अपराध नियंत्रण का सही तरीका बताया।

तारीखएनकाउंटर मौत/जख्मी
22 अप्रैल पटना : दिलीप यादव का एनकाउंटरजख्मी
26 अप्रैल नवादा: मिंटू यादव का एनकाउंटरजख्मी
30 अप्रैलभागलपुर: रामधनी यादव का एनकाउंटर मौत
6 मई सीवान: सोनू यादव का एनकाउंटरमौत
13 मई पटना: अवधेश और पप्पू का एनकाउंटरजख्मी
18 मई पटना: संदीप का एनकाउंटरजख्मी
18 मई सीवान: अंकित का एनकाउंटरजख्मी
20 मई समस्तीपुर: प्रिंस का एनकाउंटरजख्मी
21 मई जहानाबाद : विक्कू सिंह का एनकाउंटरजख्मी
21 मई किशनगंज: पवन राय का एनकाउंटरजख्मी
26 मई खगड़िया: बुद्धन मियाँ का एनकाउंटरजख्मी
27 मई पटना: अजय पासवान का एनकाउंटरजख्मी
30 मई गोपालगंज: आकाश सिंह का एनकाउंटरजख्मी
13 जून पटना: हैदर का एनकाउंटर मौत
16 जून गोपालगंज: किशन कुमार का एनकाउंटरजख्मी
16 जून गया: सुजीत का एनकाउंटरजख्मी
16 जून गया: श्रवण का एनकाउंटर

जख्मी
17 जून मुजफ्फरपुर: अमित सिंह का एनकाउंटरजख्मी
17 जून भोजपुर: भरत तिवारी का एनकाउंटर मौत