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Bihar Politics: ओवैसी के 5 विधायकों पर नजरें टिकीं… क्या बिहार में फिर से होगा 2020 वाला खेल? AIMIM प्रदेश अध्यक्ष ने तोड़ी चुप्पी

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद सीमांचल की 5 सीटों पर जीते AIMIM विधायकों के NDA में जाने की अटकलें तेज हैं। अख्तरुल ईमान ने दावा किया कि उनके विधायक अटूट हैं, लेकिन 2020 की तरह खेल दोहराने की चर्चा जारी है।

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पटना

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Anand Shekhar

Dec 11, 2025

असदुद्दीन ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी (Photo-IANS)

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस राजनीतिक दल को लेकर हो रही है, वह है असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम। सीमांचल की पांच सीटें जीतकर AIMIM ने फिर से अपनी पकड़ साबित की है, लेकिन इसके साथ ही सियासी गलियारों में फुसफुसाहट तेज हो गई है कि क्या ये विधायक भी खेला कर सकते हैं। 2020 की तरह क्या इस बार भी AIMIM के विधायक टूटकर किसी और खेमे में चले जाएंगे? इन कयासों के बीच AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने अपनी सफाई पेश की और पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है।

नीतीश–सम्राट से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें

तीन दिन पहले AIMIM के तीन विधायक सरवर आलम, मुर्शीद आलम और अख्तरुल ईमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात करने पहुंचे थे। मुलाकात के बाद जोकीहाट के विधायक मुर्शीद आलम ने नीतीश कुमार को राजनीतिक गुरु बता दिया। बस, यहीं से चर्चा शुरू हो गई कि पार्टी में टूट की बुनियाद फिर रखी जा रही है। लेकिन अख्तरुल ईमान का कहना है कि यह मुलाकात केवल अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर थी, न कि किसी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग अगर मुख्यमंत्री से नहीं मिलेंगे, मंत्री से नहीं मिलेंगे, तो आखिर किससे मिलेंगे।

विधायकों के टूटने के सवाल पर अख्तरुल ईमान का जवाब

2020 विधानसभा चुनाव के बाद AIMIM के चार विधायकों के टूटने का हवाला दिए जाने पर अख्तरुल ईमान ने साफ कहा, “हमारे लोग मजबूत हैं। ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। जनता ने इस बार पार्टी छोड़ने वालों को जो सजा दी है, उसके बाद कोई दोबारा वैसी हिम्मत नहीं कर सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि बार-बार AIMIM पर ही सवाल क्यों उठते हैं। दूसरे दलों से क्यों नहीं पूछते कि उनके लोग कब भागेंगे?

AIMIM पर निगाहें क्यों टिकी हैं?

इस चर्चा के पीछे राजनीतिक गणित बेहद साफ है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने संकेत दिया है कि 14 जनवरी यानी खरमास के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। नौ सीटें फिलहाल खाली हैं। ऐसे में AIMIM के पांच विधायक सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। सीमांचल में AIMIM का परफॉर्मेंस भी इस बार काफी बेहतर रहा है और इस वजह से दोनों बड़े गठबंधन एनडीए और महागठबंधन इन विधायकों पर नजर बनाए हुए हैं।

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि नीतीश कुमार हमेशा अपने कुनबे को मजबूत करने की कोशिश करते हैं और छोटे दलों को जोड़ने में माहिर हैं। इतिहास भी इसका गवाह रहा है, जैसे कि उन्होंने 2020 के चुनाव में जीते बसपा के इकलौते विधायक जमा खान को जदयू में शामिल करा लिया था। उन्होंने उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का भी जदयू में विलय करा लिया था, हालांकि कुशवाहा ने बाद में नीतीश से अलग होकर फिर से अपनी नई पार्टी बना ली।

क्या बीजेपी से अलग होंगे नीतीश? AIMIM अध्यक्ष ने दिया चौंकाने वाला जवाब

नीतीश कुमार पर भरोसा किए जाने के मसले पर अख्तरुल ईमान ने कहा कि सीमांचल की उपेक्षा पहले भी होती रही और आज भी हो रही है। हालांकि उन्होंने विकास के मुद्दों पर सरकार को नैतिक समर्थन देने की बात दोहराई।एनडीए गठहबंधन टूटने यानि कि नीतीश कुमार केक भाजपा से अलग हो जाने के सवाल पर अख्तरुल ईमान ने कहा, “भविष्य को किसने देखा है, लेकिन लोग यह कल्पना कैसे कर रहे हैं कि नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो जाएंगे?”

2020 की यादें फिर ताजा

2020 के चुनाव में AIMIM ने सीमांचल में पांच सीटें जीती थीं। लेकिन कुछ ही महीनों में चार विधायक टूटकर आरजेडी में शामिल हो गए थे। इसी वजह से इस बार भी वही स्क्रिप्ट दोहराए जाने की चर्चा इतनी तेज है। इस बीच, AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा है कि वे सरकार बनाने में शामिल नहीं होंगे, लेकिन विकास कार्यों पर "नैतिक समर्थन" देंगे।

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