
नीतीश कुमार और राजीव प्रताप रूडी (फोटो-फेसबुक )
बिहार की सियासत में करीब दो दशकों तक शीर्ष पर काबिज रहे नीतीश कुमार अब राज्य सभा जा रहे हैं। ऐसे में भाजपा के वरिष्ठ नेता और सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी ने अतीत के पन्नों से एक बेहद दिलचस्प किस्सा साझा किया है। यह कहानी उस समय की है जब बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में समता पार्टी का उदय हो रहा था और नीतीश कुमार तथा जॉर्ज फर्नांडिस जैसे दिग्गज राज्य की राजनीति की धुरी हुआ करते थे। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संस्मरण में राजीव प्रताप रूडी बताते हैं कि कैसे 1995 में उन्हें चुनाव का टिकट न मिलना राष्ट्रीय राजनीति की ओर उनकी यात्रा में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ।
रूडी ने बताया कि उस समय एकीकृत बिहार में समता पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले केवल तीन विधायकों में से एक वह भी थे। जॉर्ज फर्नांडिस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, जबकि नीतीश कुमार इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे। राजीव प्रताप रूडी उस समय तरैया विधानसभा क्षेत्र से सीटींग विधायक थे। लेकिन राजनीतिक बिसात कुछ इस तरह पलटी कि पूर्व मुख्यमंत्री गफ्फूर साहब के आग्रह पर उनकी सीट बदल दी गई और अंततः उनका टिकट काट दिया गया। हालांकि, नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडिस ने उनके टिकट को बचाने की कोशिश की, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हो सके। परिणाम यह हुआ कि वो 1995 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ पाए।
रूडी ने आगे बताया कि 1995 में टिकट न मिलने के बाद उनके राजनीतिक करियर की दिशा पूरी तरह से बदल गई। 1996 में वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए और छपरा (अब सारण) से लोकसभा सीट जीतकर पहली बार संसद पहुंचे। यहीं से उनकी राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री हुई और आगे चलकर उन्होंने विधायक, सांसद और केंद्रीय मंत्री तक का सफर तय किया।
एक पुरानी मुलाकात को याद करते हुए रूडी ने बताया कि नीतीश कुमार ने तब उनसे एक बड़ी बात कही थी। नीतीश कुमार ने एक बार रूडी से कहा था, 'अगर उस समय आपका टिकट नहीं कटता, तो शायद आप उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाते जहां आप आज हैं। आज आप देश की राजनीति में हैं।' रूडी के अनुसार, नीतीश कुमार की वह बात आज बिल्कुल सच साबित होती है।
अपने इस अनुभव को जीवन का एक गहरा सबक बताते हुए रूडी ने कहा कि अक्सर असफलता ही भविष्य की सफलता का रास्ता खोलती है। उन्होंने लिखा कि अगर उन्हें उस समय टिकट मिल गया होता, तो शायद वे बिहार की राजनीति तक ही सीमित रह जाते। लेकिन, टिकट न मिलने के ठीक बाद ही उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने का मौका मिला।
सांसद रूडी ने अपनी इस लंबी और सफल राजनीतिक यात्रा के लिए नीतीश कुमार और भाजपा के भीष्म पितामह कहे जाने वाले स्वर्गीय कैलाशपति मिश्रा के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि जीवन में आने वाली हर बाधा अंततः व्यक्ति को किसी बड़े उद्देश्य की ओर ले जाती है। उनकी यह यात्रा जो 1996 में BJP के साथ शुरू हुई थी आज उन्हें देश के सामने एक केंद्रीय मंत्री और एक वरिष्ठ सांसद के रूप में स्थापित कर चुकी है।
Updated on:
13 Apr 2026 07:06 am
Published on:
13 Apr 2026 07:06 am
