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BSEB Matric Result: पिता राजमिस्त्री, मां ने दवा के पैसे बचाकर भरी फीस; अब बेटी नसरीन ने हासिल किया बिहार में 5वां रैंक

BSEB Matric Result: बिहार के भोजपुर जिले के एक राजमिस्त्री की बेटी नसरीन परवीन ने मैट्रिक परीक्षा में राज्य में पांचवां रैंक हासिल किया है। बेटी की इस सफलता से मां-बाप का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। 

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 29, 2026

BSEB Matric Result

मैट्रिक में पांचवां रैंक प्राप्त करने वाली नसरीन परवीन

BSEB Matric Result: बिहार बोर्ड मैट्रिक का रिजल्ट 2026 रविवार को जारी किया गया। जैसे ही परिणाम घोषित हुए भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड के एक घर में मिठाइयां बंटने लगीं और बधाई संदेश आने लगे। इस खुशी की वजह यह थी कि घर की दो बेटियों ने मैट्रिक की परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी और उससे भी खास बात यह है कि उनमें से एक बेटी नसरीन परवीन ने तो एक ऐसा कारनामा कर दिखाया जो लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

रामदाहीन मिश्रा हाई स्कूल की छात्रा नसरीन ने 500 में से 486 अंक (97.2%) हासिल करके पूरे बिहार राज्य में 5वीं रैंक और अपने जिले में पहली रैंक हासिल की। ​​वहीं, नसरीन की बहन ने 430 अंक हासिल किए।

दवा के पैसों से मां ने भरी कोचिंग की फीस

इस ऐतिहासिक सफलता में नसरीन की मां ने अहम भूमिका निभाई। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि खुद बीमार होने के बावजूद मां ने अपनी दवा के लिए रखे पैसे बचाएं ताकि वो अपनी बेटी की कोचिंग की फीस समय पर दे सकें और उसकी पढ़ाई में कोई रुकावट न आए। नसरीन कहती हैं, 'मेरी मां ने खुद तकलीफें सहीं, अपनी दवा भी छोड़ दी, लेकिन उन्होंने मुझे कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि हमारे पास पैसों की कमी है।'

टूटा-फूटा घर और मिट्टी का चूल्हा

नसरीन के पिता अली हसन मंसूरी पेशे से राजमिस्त्री हैं। वह दिन भर चिलचिलाती धूप में मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। उनका परिवार आज भी एक टूटे-फूटे, कच्चे मकान में रहता है और घर का खाना आज भी मिट्टी के पारंपरिक चूल्हे पर ही बनता है। इन्हीं धुंओं के बीच बैठकर नसरीन रोजाना 9 से 10 घंटे पढ़ाई करती थी। वह अपनी पढ़ाई के लिए सिर्फ स्कूल और कोचिंग क्लास पर ही निर्भर नहीं रही, उसने उर्दू जैसे विषयों की तैयारी के लिए इंटरनेट का भी इस्तेमाल किया।

डॉक्टर बनने का है सपना

नसरीन का सपना अब डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है। उसने बताया कि वह इंटरमीडिएट में बायोलॉजी विषय लेकर पढ़ाई करना चाहती है, उसके बाद NEET परीक्षा पास करके अंततः एक डॉक्टर बनना चाहती है। नसरीन का कहना है कि वह नहीं चाहतीं कि गरीबी कभी भी किसी के मेडिकल इलाज में रुकावट बने। डॉक्टर बनकर, वह उन लोगों की सेवा करना चाहती हैं जिनके पास अस्पताल जाने के लिए पैसे नहीं हैं।

नसरीन ने बोर्ड परीक्षा में अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उनका कहना है कि यह केवल उनके शिक्षकों के मार्गदर्शन और उनके परिवार के सहयोग के कारण ही संभव हो पाया है कि वह इस मुकाम तक पहुंच पाई हैं। नसरीन बताती हैं कि सिर्फ किताबें रटने की जगह वो जो भी विषय पढ़ती थीं, उसे गहराई से समझकर पढ़ती थीं। जिससे उन्हें अपनी परीक्षाओं में इतनी शानदार सफलता हासिल करने में मदद की। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि नतीजे अच्छे ही आएंगे।

एक घर में दोहरी खुशी

नसरीन के घर में खुशियां दोगुनी हैं। उनकी बहन ने भी इस साल मैट्रिक की परीक्षा दी थी और उन्होंने भी 430 अंक लाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। दो बेटियों की इस सफलता ने राजमिस्त्री पिता अली हसन मंसूरी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। उन्होंने संकल्प लिया है कि वे अपनी बेटियों की पढ़ाई के लिए अपनी मेहनत और बढ़ा देंगे, लेकिन उन्हें बड़ा अफसर और डॉक्टर जरूर बनाएंगे।