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UGC नियमों पर बाहुबली के बेटे ने उठाए सवाल, कहा- बचने का मौका मिलना चाहिए

UGC Rules: बाहुबली आनंद मोहन के बेटे और नवीनगर से JDU विधायक चेतन आनंद ने UGC के नए 'इक्विटी नियमों' पर टिप्पणी की है। फेसबुक पर शेयर की गई एक लंबी पोस्ट में उन्होंने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताया है।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 29, 2026

ugc rules

जदयू विधायक चेतन आनंद (फोटो- chetan anand FB)

UGC Rules: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर देश भर में चल रही बहस के बीच, अब यह मुद्दा बिहार की राजनीति में भी गरमा गया है। पूर्व सांसद और बाहुबली आनंद मोहन के बेटे, नवीनगर से JDU विधायक चेतन आनंद ने UGC के नियमों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। चेतन आनंद का कहना है कि जातिगत भेदभाव के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कानून के गलत इस्तेमाल से बेगुनाह छात्रों को फंसाए जाने की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

छात्रों से बातचीत के नतीजे

अपने फेसबुक पोस्ट में चेतन आनंद ने बताया कि उन्होंने कई कॉलेजों के छात्रों से आमने-सामने बातचीत की, जो कई घंटों तक चली। इन बातचीत के दौरान छात्रों ने UGC एक्ट और नए इक्विटी नियमों को लेकर अपनी चिंताएं खुलकर बताईं। बातचीत के नतीजों को शेयर करते हुए विधायक ने कहा कि अगर कोई ऊंची जाति का छात्र जातिगत भेदभाव करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, अगर किसी को निजी दुश्मनी या बदले की भावना से झूठा फंसाया जाता है, तो आरोप लगाने वाले के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने साफ लिखा कि कानून का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और दोषी को सजा देने के साथ-साथ निर्दोष को बचने का अवसर भी मिलना चाहिए।

2012 के नियमों का जिक्र

चेतन आनंद ने UGC के पुराने नियमों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि 2012 के नियमों में यह प्रावधान था कि अगर जातिगत भेदभाव का आरोप झूठा साबित होता है या जानबूझकर किसी को फंसाने की कोशिश की जाती है, तो आरोप लगाने वाले पर जुर्माना लगाया जाएगा, लेकिन नए नियमों से इसे क्यों हटा दिया गया है। उनके मुताबिक, इस बदलाव से कानून एकतरफा हो सकता है।

इक्विटी कमेटी में प्रतिनिधित्व की मांग

JDU विधायक ने यह भी कहा कि अगर UGC की इक्विटी कमेटी जातिगत भेदभाव की जमीनी हकीकत को समझना चाहती है, तो नियम बनाने वालों को गांवों और कॉलेज कैंपस में जाकर असल सामाजिक ढांचे को समझना चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि UGC की इक्विटी कमेटी में ऊंची जाति समुदाय का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए ताकि सभी पक्षों की बात सुनी जा सके और संतुलित फैसला लिया जा सके।

UGC नियमों को लेकर क्या विवाद है?

UGC (यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन) ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के छात्रों के साथ भेदभाव को रोकने के लिए नए 'इक्विटी नियम' लागू किए हैं। इन नियमों के तहत भेदभाव का दोषी पाए जाने वाले किसी भी शिक्षक, छात्र या स्टाफ सदस्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

हालांकि, जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का एक ग्रुप, खासकर ऊंची जातियों के स्टूडेंट्स को डर है कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल करके झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं। नियमों का विरोध करने वालों का तर्क है कि झूठी शिकायतें करने वालों के खिलाफ इनमें साफ सजा के प्रावधान नहीं हैं, जिससे बेगुनाह लोगों के एकेडमिक करियर खतरे में पड़ सकते हैं। नतीजतन, कई राज्यों में स्टूडेंट्स संगठन और सोशल ग्रुप इन नियमों का विरोध कर रहे हैं, और इन्हें "काले कानून" भी कह रहे हैं।

कानून भेदभाव वाला नहीं होना चाहिए

अपनी पोस्ट के आखिर में चेतन आनंद ने लिखा कि इस देश में भेदभाव की कोई जगह नहीं है, लेकिन भेदभाव को रोकने की आड़ में कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि "कानून भेदभाव वाला नहीं होना चाहिए" और मार्टिन लूथर किंग जूनियर को कोट करते हुए लिखा, "कहीं भी हो रहा अन्याय, हर जगह हो रहे न्याय के लिए खतरा है।"

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