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कांग्रेस का आरजेडी को तगड़ा झटका, बिना बताए सड़क पर उतरी पार्टी, क्या बिहार में खत्म हुआ महागठबंधन?

पटना गर्ल्स हॉस्टल प्रकरण के साथ कांग्रेस  बिहार में अपनी तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम कहते हैं कि बिहार की जनता हमने विपक्ष की भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

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पटना में कांग्रेस का प्रदर्शन (फोटो-पत्रिका)

कांग्रेस बिहार में संगठन को मजबूत करने की कवायद में जुट गई है। सोमवार को पटना गर्ल्स हॉस्टल में कथित हैवानियत मामले पर सुबह में विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के बिहार प्रभारी भी उपस्थित थे। घटना के नौ दिनों के बाद कांग्रेस के सड़क पर बिना आरजेडी के उतरने की राजनीति गलियारे में खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि पार्टी बिहार में अब अपने दम पर अपना जनाधार मजबूत करने में लगी है।

कांग्रेस- आरजेडी में खटपट

कांग्रेस और आरजेडी में खटपट तो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के वक्त से ही चला आ रहा है। चुनाव के बाद कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने इसको लेकर एक बड़ा बयान देते हुए कहा था कि आरजेडी के साथ कांग्रेस के गठबंधन चुनाव तक ही था। यही कारण है कि चुनाव के बाद कांग्रेस अपने दम पर पार्टी को बिहार में खड़ा करना चाह रही है। इसकी तैयारी चुनाव के बाद से ही पार्टी ने शुरू कर दिया है। सोमवार को पटना गर्ल्स हॉस्टल के मुद्दे पर कांग्रेस ने आरजेडी को निमंत्रण नहीं दिया। अपने दम पर प्रदर्शन किया। आरजेडी के नेता भी मानते हैं कि कांग्रेस की ओर से इसकी कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसकी वजह से हम लोग उसमें शामिल नहीं हुए। आरजेडी महिला प्रकोष्ठ की ओर से एक दो दिनों में पटना गर्ल्स हॉस्टल प्रकरण पर सड़क पर उतरने की तैयारी चल रही है।

कांग्रेस का ‘एकला चलो’ का फैसला

महगठबंधन के घटक दल आरजेडी, भाकपा, माकपा और माले को छोड़कर केवल अपने बैनर तले कांग्रेस मनरेगा के महत्वपूर्ण प्रावधानों को हटाने के खिलाफ इन दिनों सड़क पर है। कांग्रेस इसी क्रम में ज्वलंत मुद्दों पर अपना विरोध भी व्यक्त कर रही है। पटना में अपने इस अभियान के दौरान ही प्रदर्शन किया। इसी प्रकार से मंगलवार को खगड़िया में मनरेगा के साथ साथ दुष्कर्म के एक मामले पर भी कांग्रेस ने वहां पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम कहते हैं कि बिहार की जनता ने हमने विपक्ष की भूमिका निभाने का अवसर दिया है। हम वह भूमिका पूरी ईमानदारी से पूरा करना चाहते हैं। कांग्रेस ऐसा कर जमीन पर अपनी ताकत बढ़ाना चाह रही है। सीनियर पत्रकार लव कुमार कहते हैं कि बिहार में विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की करारी हार के बाद कांग्रेस बिहार में अपनी जमीन तैयार करने में लग गई है। जो सूचना है उसके अनुसार प्रदेश में महागठबंधन के खत्म होने की अब केवल औपचारिक घोषणा होनी बाकी है। कांग्रेस विधायक दल के नेता रहे शकील अहमद खां ने भी आरजेडी के साथ कांग्रेस के गठबंधन को घाटे का सौदा बता चुके हैं।

क्यों हुई आरजेडी से खटपट

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अगस्त-सितंबर 2025 में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) का विरोध शुरू किया था। कांग्रेस के इस विरोध को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला था। 'वोटर अधिकार यात्रा' के बाद बिहार में विपक्षी दलों की एकता की मजबूती की चर्चा हो गई थी। लेकिन, यात्रा का नेतृत्व कर रहे कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहीं भी आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को विपक्ष के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया। सूत्रों का कहना है कि इसको लेकर महागठबंधन में खटपट शुरू हो गया था। इसकी बानगी वोटर अधिकार यात्रा के बाद बिहार में तेजस्वी यादव की'बिहार अधिकार यात्रा' में दिखी। तेजस्वी यादव ने अपनी इस यात्रा से कांग्रेस से दूरी बना लिया था। इसके बाद से ही इसकी चर्चा शुरू हो गई थी कि चुनाव बाद महागठबंधन में दरार पड़ सकता है। चुनाव के बाद बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने महागठबंधन चुनाव तक ही था कह कर इसके संकेत दे दिए थे।