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दीपक ने मंदिर में की मौसेरी बहन से शादी, एक महीने बाद हत्या कर बोरी में किया पैक; बोला- बहुत टोकती थी

बिहार के छपरा में एक युवक ने पहले अपनी ही मौसेरी बहन से प्रेम विवाह किया। लेकिन एक महीने बाद ही उसने उसकी हत्या भी कर दी। आरोपी ने पुलिस की पूछताछ में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। 

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पटना

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Anand Shekhar

Apr 26, 2026

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शादी के बाद सीपक और आरध्या एवं बोरी में पैक लाश

Bihar News: बिहार के छपरा जिले में एक डिप्लोमा इंजीनियर दीपक कुमार ने अपनी ही मौसेरी बहन आराध्या की हत्या कर दी। दीपक पिछले 13 सालों से आराध्या से प्यार करता था और परिवार को बिना बताए उसने चुपके से एक मंदिर में उससे शादी कर ली थी। आरोपी ने पुलिस पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने पुलिस को बताया कि आराध्या उसकी निजी जिंदगी में बहुत ज्यादा दखल देने लगी थी, जिसकी वजह से उसने उसकी हत्या कर दी।

पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी दीपक कुमार ने बताया कि वह और आराध्या बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। उनके नाना-नानी का घर एक ही था, जिसकी वजह से उनकी अक्सर मुलाकात होती रहती थी। दीपक लगभग 13 सालों से आराध्या से प्यार करता था। चार साल पहले जब आराध्या के परिवार ने उसकी शादी कहीं और तय कर दी, तो उसने इस फैसले का विरोध किया और वह घर छोड़कर छपरा में एक किराए के मकान में रहने लगी। आराध्या ने वहां एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया और दीपक अक्सर उससे मिलने जाता रहता था।

मंदिर में गुपचुप की शादी

दीपक और आराध्या तीन साल तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इस बीच दीपक के पिता ने उसकी शादी सिवान में कहीं और तय कर दी। समाज और खानदान की दुहाई देकर दीपक पर दबाव बनाया जाने लगा। पूरा परिवार उसे शादी के लिए मनाने में जुट गया।

इधर, आराध्या भी शादी की जिद कर रही थी। दबाव में आकर दीपक ने 13 मार्च को मंदिर में छिपकर आराध्या से शादी तो कर ली, लेकिन वह मन ही मन उसे रास्ते से हटाने की साजिश रचने लगा क्योंकि उसे सिवान में उस दूसरी लड़की से भी शादी करनी थी।

हादसा बनाने में फेल हुआ तो गला घोंटा

आरोपी दीपक ने कबूल किया कि उसने शादी के महज 15 दिन बाद से ही आराध्या की हत्या की साजिश रचनी शुरू कर दी थी। शुरू में उसने आराध्या को हाजीपुर रेलवे ट्रैक पर ले जाकर एक हादसा दिखाने की कोशिश की, ताकि किसी को कोई शक न हो। हालांकि, आराध्या उसके साथ वहां नहीं गई क्योंकि उसकी तबीयत ठीक नहीं थी। इसके बाद दीपक ने एक दूसरी योजना बनाई।

12 अप्रैल की रात को दीपक आराध्या को अपने पुश्तैनी गांव भगवानपुर हाट ले गया। वहां उसके परिवार वालों ने आराध्या पर ताने कसे और शादी खत्म करने की मांग की। रात करीब 11 बजे जब आराध्या बिना खाना खाए सो गई, तो दीपक ने सोते हुए ही उसका गला घोंटकर उसकी जान ले ली।

बोरी में पैक कर शव को लगाया ठिकाने

हत्या के बाद सबूत मिटाने की कोशिश में दीपक ने आराध्या के शव को एक बोरी में भर दिया। सुबह करीब साढ़े तीन बजे उसने शव को सारण और सीवान जिले के बॉर्डर इलाके में कहीं फेंक दिया, जो उसके घर से लगभग 15 किलोमीटर दूर था। 21 अप्रैल को जब आराध्या के पिता को उसके लापता होने का पता चला और उन्हें दीपक की दूसरी शादी के बारे में भनक लगी, तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शुरुआती पूछताछ के दौरान दीपक पुलिस को गुमराह करता रहा। हालांकि, फिर कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया और लाश वाली जगह की जानकारी दी।

इज्जत के लिए की हत्या

दीपक ने पुलिस को हत्या की वजह बताते हुए कहा, 'समाज में हमारी बहुत इज्जत है। मेरे परिवार वाले मुझ पर सामाजिक ताने कसते थे और मुझ पर किसी और से शादी करने का दबाव डालते थे। आराध्या भी मुझ पर दबाव डालने लगी थी। वह लगातार फोन करती रहती थी और हर समय पूछती रहती थी कि मैं कहां हूं और क्या कर रहा हूं। उसकी इसी टोका-टाकी और घर वालों के दबाव की वजह से मैंने उसकी हत्या कर दी।'