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जेल से निकले, राजगीर पहुंचे… फिर पूरे परिवार ने लगाया फंदा, हत्या के पाप से मुक्ति और मोक्ष की चाह में दी जान, सुसाइड मिस्ट्री का खुलासा

Bihar News: राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला में मिली चार लाशों का रहस्य सुलझ गया है। पुलिस जांच में पता चला कि ये मौतें गिल्ट की भावना और मोक्ष की चाहत में किया गया सामूहिक सुसाइड था।

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पटना

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Anand Shekhar

Feb 08, 2026

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दिगंबर जैन धर्मशाला

Bihar News: बिहार के मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन राजगीर के एक गेस्ट हाउस में मिली चार लाशों का रहस्य सुलझ गया है। पुलिस जांच और परिवार से मिली जानकारी से जो कहानी सामने आई है, वह दिल दहला देने वाली है। बेंगलुरु के एक परिवार के चार सदस्यों ने अपने भतीजे की हत्या के "पाप" का प्रायश्चित करने और मोक्ष पाने के लिए राजगीर की पवित्र भूमि पर आत्महत्या कर ली। चारों शव धर्मशाला के कमरे के अलग-अलग कोनों में फंदे से लटके मिले।

कमरा नंबर 6AB में क्या मिला

शुक्रवार सुबह, जब राजगीर के दिगंबर जैन धर्मशाला के कमरा नंबर 6AB से असहनीय बदबू आई, तो स्टाफ ने पुलिस को सूचना दी। जब पुलिस ने दरवाजा तोड़ा, तो अंदर का नजारा रोंगटे खड़े कर देने वाला था। कमरे के चारों कोनों में चार शव फंदे से लटके मिले। मृतकों की पहचान बेंगलुरु के नागासंद्रा के रहने वाले जीआर नागा प्रसाद (30), उनकी दिव्यांग मां जीआर सुमंगला और उनकी दो बहनें शिल्पा और श्रुता के रूप में हुई।

नागा ने कर दी थी भांजे की हत्या

पुलिस जांच और बेंगलुरु से पटना आए परिवार के सदस्यों ने इस सामूहिक आत्महत्या के पीछे की मुख्य वजह बताई। पता चला कि नागा प्रसाद इंजीनियरिंग ग्रेजुएट था, लेकिन बेरोजगारी के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। सबसे बड़ी घटना पिछले जुलाई में हुई। नागा की तलाकशुदा बहन शिल्पा का 14 साल का बेटा ओमकृति ऑनलाइन गेमिंग और जुए का आदी हो गया था। जब आर्थिक तंगी से जूझ रहे नागा को पता चला कि उसका भांजा परिवार का पैसा जुए में उड़ा रहा है, तो उसने गुस्से में आकर अपने भांजे की हत्या कर दी।

जमानत मिलने के बाद निकले मोक्ष की तलाश में

नागा प्रसाद ने अपने भतीजे की हत्या के आरोप में पांच महीने जेल में बिताए। उसे 17 दिसंबर को जमानत मिल गई थी। जेल से रिहा होने के बाद पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और अपराधबोध में डूब गया। वे समाज का सामना करने से डर रहे थे और नागा को लगातार यह महसूस हो रहा था कि उसने अपने ही भांजे को मारकर एक अक्षम्य पाप किया है। परिवार के सदस्यों के अनुसार, पूरे परिवार ने इस पाप का प्रायश्चित करने और मोक्ष (मुक्ति) पाने के लिए तीर्थयात्रा पर जाने का फैसला किया।

31 जनवरी को राजगीर पहुंचा पूरा परिवार

पुलिस की टाइमलाइन के मुताबिक, परिवार नेपाल की यात्रा पूरी करने के बाद 31 जनवरी को राजगीर पहुंचा था। उन्हें आखिरी बार 1 फरवरी को धर्मशाला के स्टाफ ने जिंदा देखा था। 2 से 5 फरवरी तक कमरे में कोई हलचल नहीं हुई और दरवाजा अंदर से बंद था। 6 फरवरी को, तेज बदबू आने पर पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और अंदर से सड़ी-गली हालत में लाशें बरामद कीं। पुलिस को मौके से 1.18 लाख रुपये कैश और गहने भी मिले, जिससे लूट की संभावना खत्म हो गई।

जांच के लिए बनाई गई SIT

नालंदा SP भरत सोनी ने मामले की गहराई से जांच के लिए 8 सदस्यों की SIT बनाई है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि यह सामूहिक आत्महत्या थी या नागा प्रसाद ने आत्महत्या करने से पहले अपनी मां और बहनों को मार डाला था। सबूत इकट्ठा करने के लिए दो सदस्यों की पुलिस टीम बेंगलुरु भेजी गई है।

आधी रात को अंतिम संस्कार

शनिवार को, बेंगलुरु से आए रिश्तेदारों ने पटना के PMCH में शवों की पहचान की। चूंकि परिवार में कोई जिंदा सदस्य नहीं बचा है, इसलिए पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शवों को उनके पड़ोसियों और दूर के रिश्तेदारों को सौंप दिया। चारों का अंतिम संस्कार शनिवार देर रात पटना में किया गया।