8 जून 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जब जारी हुआ था खान सर का अरेस्ट वारंट; पुलिस को चकमा देने के लिए हटाया फास्टैग, मोबाइल छोड़ रातों-रात पहुंचे वृंदावन

Khan Sir Arrest Warrant: पटना के मशहूर टीचर खान सर अभी गंभीर कानूनी मामलों में फंसे हुए हैं और उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। इसी बीच, उनका एक पुराना वीडियो सामने आया है जिसमें वे बता रहे हैं कि एक बार गिरफ्तारी का वारंट जारी होने के बाद, वे कैसे पुलिस से बचकर रातों-रात वृंदावन भाग गए थे।

3 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Jun 08, 2026

khan sir controversy

पटना के चर्चित शिक्षक खान सर

Khan Sir Arrest Warrant:बिहार के लोकप्रिय शिक्षक फैजल खान उर्फ खान सर इन दिनों एक बार फिर कानूनी दांव-पेंच में फंसे हुए हैं। कोचिंग संस्थान के गेट पर हुई फायरिंग और आर्म्स ऐक्ट के तहत केस दर्ज होने के बाद पुलिस उनकी तलाश कर रही है, जबकि गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने पटना सिविल कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर दी है। इस पूरे कानूनी घटनाक्रम के बीच खान सर का एक पुराना वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में उन्होंने खुद बताया कि कैसे एक बार पटना के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा अरेस्ट वारंट जारी होने के बाद वह पुलिस को चकमा देकर रातों-रात बिहार छोड़कर भाग गए थे।

लोकेशन छिपाने के लिए गाड़ी का फास्टैग ही हटा दिया

खान सर ने बताया कि जब उन्हें पुख्ता जानकारी मिली कि पटना प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी का आदेश जारी कर दिया है और पुलिस कभी भी उनके पास पहुंच सकती है, तो उन्होंने तुरंत पटना छोड़ने की योजना बनाई। पुलिस आमतौर पर किसी भी आरोपी या संदिग्ध गाड़ी का पीछा करने और उसकी लोकेशन जानने के लिए नेशनल हाईवे के टोल प्लाजा पर होने वाले फास्टैग ट्रांजैक्शन का सहारा लेती है। खान सर ने इस जांच प्रक्रिया को नाकाम करने के लिए एक शातिर गेम खेला। उन्होंने अपनी गाड़ी की विंडशील्ड पर लगा फास्टैग ही उखाड़ दिया। उन्होंने बताया कि टोल प्लाजा पर बिना फास्टैग के जाने पर दोगुना जुर्माना लगता है, लेकिन उन्होंने खुशी-खुशी टोल कर्मियों को कैश में तिगुना भुगतान किया।

पुलिस को गुमराह करने के लिए पटना में छोड़ दिया मोबाइल

पुलिस की टेक्निकल सर्विलांस टीम की आंखों में धूल झोंकने के लिए खान सर ने अपना निजी मोबाइल फोन अपने साथ ले जाने के बजाय पटना में ही चालू हालत में छोड़ दिया। खान सर ने ऐसा इसलिए किया ताकि अगर पुलिस मोबाइल टावर ट्रायंगुलेशन या सीडीआर के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश करे, तो पुलिस को यही लगे कि खान सर अभी भी पटना में ही मौजूद हैं। इस तरह उन्होंने अपनी असली लोकेशन को पूरी तरह सुरक्षित रखा और पुलिस को एक गलत दिशा में उलझाए रखा।

रास्ते में कार बदली और खुद ऑटो से पहुंचे वृंदावन

इतना ही नहीं, खान सर ने पुलिस को पूरी तरह गुमराह करने के लिए रास्ते में ही अपनी कार से उतरने का फैसला किया। उन्होंने अपनी गाड़ी को सीधे दिल्ली की तरफ रवाना कर दिया, जबकि वह खुद रास्ता बदलकर उत्तर प्रदेश के वृंदावन की ओर मुड़ गए। खान सर ने बताया कि अगर पुलिस उनकी गाड़ी की तलाश करती या उसे किसी तरह लोकेट कर भी लेती, तो वह यही मानकर चलती कि खान सर दिल्ली भाग गए हैं। जबकि असलियत यह थी कि वह उस समय एक साधारण ऑटो-रिक्शा में बैठकर वृंदावन की संकरी गलियों में दाखिल हो चुके थे।

साधुओं की जमात में छिपे रहे और भगवान कृष्ण से मांगी मदद

धार्मिक नगरी वृंदावन पहुंचने के बाद खान सर ने अपनी पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा। वे विख्यात संत प्रेमानंद जी महाराज के भक्तों और अन्य साधु-संतों की जमात के बीच एक आम इंसान की तरह गुमनाम होकर रहने लगे। उन्होंने बताया कि संकट की इस घड़ी में उन्होंने सीधे भगवान कृष्ण की शरण ली क्योंकि कृष्ण जी का खुद का जन्म भी जेल में ही हुआ था। उन्होंने भगवान से प्रार्थना की कि उन्हें जेल जाने से बचाएं। वृंदावन में बिताए उन चार-पांच दिनों को याद करते हुए खान सर ने वहां की सुबह की ताजी हवा और मशहूर कचौड़ियों की जमकर तारीफ की, जिसे उन्होंने स्वाद के मामले में अमृत के समान बताया।

छात्रों के रिजल्ट का भरोसा मिलने के बाद ही लौटे पटना

खान सर ने यह भी कहा कि वह पुलिस के डर से मैदान छोड़कर भागने वाले इंसान नहीं हैं। उन्होंने साफ किया कि वह पटना से केवल तभी रवाना हुए थे, जब उन्हें शीर्ष स्तर से यह ठोस आश्वासन मिल गया था कि आंदोलित छात्रों के परीक्षा परिणाम (रिजल्ट) को रिवाइज किया जाएगा और उनके साथ पूरा न्याय होगा।

हालांकि, खान सर ने यह नहीं बताया कि यह मामला कब है। लेकिन यह कयास लगाए जा रहे हैं कि यह पूरा वाकया साल 2022 के रेलवे एनटीपीसी आंदोलन या फिर दिसंबर 2024 के बीपीएससी छात्र आंदोलन के समय का हो सकता है, जब पटना के कई प्रमुख शिक्षकों पर एफआईआर दर्ज की गई थी।