
बिहार पुलिस एनकाउंटर में मारा गया कुंदन ठाकुर (बाएं) और प्रियांश दुबे (दाएं)
Bihar Police Encounter: बिहार के पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) जिले में, सुबह की शांति गोलियों की तड़तड़ाहट से टूट गई। चकिया थाना क्षेत्र में पुलिस और STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स) की एक संयुक्त टीम ने एक बड़ी मुठभेड़ में गैंगस्टर कुंदन ठाकुर और उसके दाहिने हाथ माने जाने वाले प्रियांश दुबे को मार गिराया। हालांकि, इस मुठभेड़ में बिहार पुलिस ने अपने एक बहादुर STF जवान श्रीराम यादव को खो दिया। अपराधियों की गोलियों का सामना करते हुए उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।
जानकारी के अनुसार, मुठभेड़ से ठीक 24 घंटे पहले, कुंदन ठाकुर ने चकिया थाने के एडिशनल SHO (स्टेशन हाउस ऑफ़िसर) गौरव कुमार को फोन किया था और खुली चुनौती दी थी। फोन पर कुंदन ने शेखी बघारते हुए कहा था कि अगर पुलिस ने उससे मुठभेड़ करने की हिम्मत की, तो न्यूज की अगली हेडलाइन यह होगी, 'अपराधियों और पुलिस के बीच गोलीबारी में 10-15 पुलिसकर्मी मारे गए और अपराधी फरार।' उसने यहां तक दावा किया कि वह दोनों हाथों से एक साथ गोली चलाना जानता है और पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाएगी।
सीधी धमकी देते हुए, कुंदन ने कहा था, "गुंडई क्या होती है, आपको और पूरे शहर को दिखा देंगे। अगर पुलिस को लगता है कि वे मुझे पकड़ सकते हैं, तो कोशिश करके देख लें… अगर मुठभेड़ होती है, तो मैं भागने वालों में से नहीं हूं, मैं एक लड़ने वाला आदमी हूं और मैं दोनों हाथों से गोली चलाता हूं।' इसके अलावा, कुंदन ने पुलिस अधिकारियों के परिवारों को भी नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। पुलिस ने कुंदन की इस धमकी को हल्के में नहीं लिया और उन्होंने तुरंत एक जवाबी कार्रवाई की योजना बनाई।
कुंदन ठाकुर मोतिहारी के चकिया (बुल्ला चौक) का रहने वाला था। महज 20 साल की उम्र तक, उसने संगठित अपराध की दुनिया में अपनी गहरी पैठ बना ली थी। कुंदन ने अपने बचपन में ही अपराध की दुनिया में कदम रख दिया था, उसके खिलाफ पहला मामला आर्म्स एक्ट के तहत 2019 में दर्ज किया गया था, जब वह महज 14 साल का था। पिछले छह सालों में, उसके खिलाफ आधे दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें हत्या की कोशिश, लूट और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के आरोप शामिल थे।
वह मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में सक्रिय था, जहां वह कम उम्र के लड़कों को अपने गैंग में भर्ती करता था और उन्हें 'किड गैंगस्टर' (बाल अपराधी) बनाता था। उसे AK-47 और कार्बाइन जैसे आधुनिक हथियार चलाने का शौक था और वह अक्सर सोशल मीडिया या फोन कॉल के जरिए पुलिस को नीचा दिखाने की कोशिश करता था।
प्रियांश दुबे, जो कुंदन के साथ मारा गया, मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव का रहने वाला था। बताया जाता है कि वह भी काफी कम उम्र का था। प्रियांश, कुंदन का सबसे भरोसेमंद साथी और उसका मुख्य शूटर था। वह मुजफ्फरपुर के अलग-अलग हिस्सों में गैंग के ऑपरेशन्स की अगुवाई करता था। उसकी उम्र लगभग कुंदन जितनी ही थी। पुलिस फिलहाल उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली थी कि कुंदन अपने गैंग के साथ, चकिया इलाके के रामडीहा (सिहरोवा) गांव में अपने एक साथी के घर छिपा हुआ है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए, स्थानीय पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की एक संयुक्त टीम ने देर रात पूरे इलाके को घेर लिया।
जब पुलिस ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया, तो कुंदन और प्रियांश ने घर की छत और खिड़कियों से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अपराधियों ने इस गोलीबारी के दौरान कार्बाइन और पिस्तौल का इस्तेमाल किया।पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग शुरू की, जिसमें कुंदन ठाकुर और प्रियांश दुबे को कई गोलियां लगीं और वे मौके पर ही ढेर हो गए। इस मुठभेड़ में सीवान निवासी एसटीएफ जवान श्रीराम यादव को भी गोली लगी। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहा इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
हथियारों का जखीरा बरामद
इसके बाद मौके पर चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान, पुलिस ने एनकाउंटर वाली जगह से हथियारों का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। पुलिस को शक है कि इन हथियारों का इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था। घटनास्थल से पुलिस ने एक कार्बाइन, दो पिस्तौल, दो देसी कट्टे, 17 खाली कारतूस और कई जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
इस ऑपरेशन के दौरान, पुलिस ने उज्ज्वल कुमार और संत तिवारी नाम के दो लोगों को भी गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि ये दोनों सिहोरवा गांव के रहने वाले हैं। पुलिस फिलहाल उनसे पूछताछ कर रही है ताकि गैंग के दूसरे सदस्यों और उनके आपराधिक नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटाई जा सके।
Updated on:
17 Mar 2026 01:28 pm
Published on:
17 Mar 2026 01:24 pm
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