
लालू यादव और तेज प्रताप यादव फोटो- PTI
Makar Sankranti 2026: तेज प्रताप यादव से नाराज नहीं हैं। वो परिवार के साथ ही आकर रहें। तेज प्रताप यादव की ओर से आयोजित दही-चूड़ा भोज में पहुंचे आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पत्रकारों के सवाल का जवाब देते हुए ये बातें कही। 25 मई को RJD अध्यक्ष लालू प्रसाद ने अपने बड़े बेटे तेजप्रताप को पार्टी और घर से छह वर्षो के लिए बाहर निकाल दिया था। लेकिन, आज तेज प्रताप यादव के दही-चूड़ा भोज में लालू प्रसाद की मौजूदगी को परिवारिक एकजुटता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सोशल मीडिया पर लालू यादव ने तेज प्रताप यादव को घर से निकालने का पोस्ट करते हुए लिखा था कि उनके बड़े बेटे (तेज प्रताप) की "गतिविधि, लोक आचरण और गै़र ज़िम्मेदाराना व्यवहार हमारे पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के अनुरूप नहीं है." इसको देखते हुए पार्टी और परिवार में अब से तेज प्रताप यादव की किसी भी प्रकार की कोई भूमिका नहीं रहेगी। दरअसल, लालू प्रसाद ने 8 महीने पहले तेजप्रताप की गर्लफ्रेंड के साथ फोटो सामने आने के बाद तेजप्रताप को घर और पार्टी से बाहर निकाल दिया था।
लेकिन, 8 माह के बाद लालू प्रसाद ने तेज प्रताप यादव को घर में आने का निमंत्रण देते हुए कहा कि मैं तेज प्रताप से नाराज नहीं हैं। वो परिवार के साथ ही आकर रहें। लालू प्रसाद अपने बड़े बेटा तेज प्रताप यादव का निमंत्रण स्वीकार करने के बाद बुधवार को मकर संक्रांति पर आयोजित दही चूड़ा भोज में शामिल भी हुए। उनके पहुंचते ही तेज प्रताप यादव और कार्यकर्ता उत्साहित हो गए। लालू प्रसाद ने सभी को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दही-चूड़ा का भोज बिहार की संस्कृति और परंपरा का अहम हिस्सा है। सभी लोगों को मिल-जुलकर मनाना चाहिए।
तेज प्रताप और परिवार में चल रहे खटपट से जुड़े सवाल पर लालू यादव ने कहा कि परिवार में किसी तरह की कोई नाराजगी नहीं है। सब कुछ ठीक चल रहा। तेजप्रताप यादव को आशीर्वाद देते हुए लालू प्रसाद ने कहा कि मेरी तेज प्रताप को लेकर कोई नाराजगी नहीं है। वो परिवार के साथ ही आकर रहें। उन्होंन तेजप्रताप की ओर से आयोजित दही चूड़ा भोज को लेकर कहा कि इस प्रकार का आयोजन हर किसी को करना चाहिए। आपसी मेल-मिलाप से ही समाज में सकारात्मक संदेश जाता है। लालू यादव की तेजप्रताप के घर पर मौजूदगी को परिवारिक एकजुटता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। मकर संक्रांति के बहाने हुई इस मुलाकात के बाद उपस्थित लोगों ने कहा कि दही-चूड़ा भोज बिहार की राजनीति में सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि सियासत का अहम रंग भी है।
Updated on:
14 Jan 2026, 4:08 PM IST
Published on:
14 Jan 2026, 4:07 PM IST
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