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लालू ने तो सगे भाई और राबड़ी के चाचा को भी नहीं छोड़ा! JDU का लालू परिवार पर हमला, पूछा- तरुण यादव के नाम पर किसकी संपत्ति?

Bihar Politics: लालू परिवार से जुड़े नौकरी के बदले जमीन घोटाले पर कोर्ट की टिप्पणी के बाद बिहार की राजनीति में तूफान आ गया है। जदयू प्रवक्ता ने लालू प्रसाद और उनके परिवार पर रिश्तेदारों से भी जमीन अपने नाम करवाने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की।

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पटना

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Anand Shekhar

Jan 09, 2026

Bihar politics

लालू यादव और तेजस्वी यादव (फ़ोटो-Lalu Yadav FB)

Bihar Politics: जमीन के बदले नौकरी घोटाले मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए RJD सुप्रीमो लालू यादव, राबड़ी देवी और उनके परिवार के सदस्यों समेत 46 लोगों के खिलाफ आरोप तय किए। इससे शुक्रवार को बिहार में एक नया राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य 'एक क्रिमिनल सिंडीकेट की तरह काम कर रहे थे,' जदयू ने लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर सीधा हमला बोला।

जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने कहा कि अदालत की यह टिप्पणी केवल कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक और नैतिक संकट का मामला है और लालू परिवार को अब सार्वजनिक जवाब देना चाहिए।

JDU का आरोप: लालू यादव परिवार ने रिश्तेदारी भी नहीं छोड़ी

प्रवक्ता नीरज कुमार ने दावा किया कि नौकरी के बदले जमीन का खेल सिर्फ आम नागरिकों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह परिवार की रिश्तेदारी तक फैला हुआ था। उन्होंने कहा, “लालू जी ने अपने सगे बड़े भाई स्वर्गीय मंगरु राय के परिजनों को नौकरी दी, लेकिन उनसे भी एक बीघा जमीन लिखवा ली। राबड़ी देवी के चाचा नाटा चौधरी के परिजनों को भी नौकरी दी गई, पर जमीन फिर भी लिखवा ली। यही नहीं तेजस्वी यादव का दूसरा नाम तरुण यादव है और तरुण यादव के नाम पर भी संपत्ति है। यह सवाल है कि वह संपत्ति किसकी है और कैसे बनी?”

इस्तीफे की मांग

प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि नैतिकता की मांग है कि लालू परिवार के जिम्मेदार सदस्य अपने पदों से इस्तीफा दें। उन्होंने कहा, "यह साफ है कि इन लोगों ने धोखाधड़ी की है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट की यह टिप्पणी कि लालू परिवार एक आपराधिक राजनीतिक सिंडिकेट चला रहा है, एक गंभीर न्यायिक टिप्पणी है। इसलिए, इन तीनों लोगों को इस्तीफा दे देना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि राजनीति कोई निजी धंधा नहीं है और न ही सत्ता का इस्तेमाल किसी धंधे या आपराधिक राजनीतिक सिंडिकेट को चलाने के लिए किया जा सकता है।

संपत्ति जब्त करके समाज के फायदे के लिए इस्तेमाल करने की मांग

JDU प्रवक्ता ने आगे कहा कि न्यायपालिका को अब इस मामले में सुनवाई और फैसला जल्दी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कानून आरोपी को दोषी साबित करता है और संपत्ति जब्त करने का आदेश दिया जाता है, तो इसे समाज के गरीब तबकों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इस संपत्ति का इस्तेमाल अनाथालयों, विधवा आश्रमों या बहुत पिछड़े समुदायों के छात्रों के लिए हॉस्टल के लिए किया जाना चाहिए।