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हाथ में तिरंगा और कलाइयों में बेड़ियां… पटना की सड़कों पर उतरीं NDA की महिलाएं, विपक्ष के खिलाफ आक्रोश

आज पटना की सड़कों पर महिलाओं का एक विशाल सैलाब उमड़ पड़ा। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पारित न हो पाने के बाद NDA की महिला कार्यकर्ताओं ने विपक्ष के खिलाफ 'जन आक्रोश मार्च' निकाला।

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पटना

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Anand Shekhar

Apr 20, 2026

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पटना की सड़कों पर उतरीं महिलाएं

बिहार की राजधानी पटना आज विपक्षी दलों के खिलाफ हजारों महिलाओं द्वारा लगाए गए नारों से गूंज उठी। लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को बहुमत न मिल पाने से आक्रोशित एनडीए (भाजपा, जदयू, LJPR, HAM और RLM) की महिलाओं ने ऐतिहासिक गांधी मैदान से कारगिल चौक तक जन आक्रोश मार्च निकाला। हाथों में तिरंगा लिए महिलाएं जब सड़कों पर उतरीं, तो विपक्षी दलों के खिलाफ उनका गुस्सा सातवें आसमान पर था।

जंजीरों में जकड़ी महिला

इस प्रदर्शन में एक महिला कार्यकर्ता हाथों में लोहे की जंजीरें (सिक्कड़) बांधकर गांधी मैदान स्थित धरना स्थल पर पहुंची। इस दौरान मीडिया से बात करते हुए महिला ने कहा कि वे अपना अधिकार और सम्मान लेकर रहेंगी. 33 % आरक्षण सरकार को लागू करना होगा. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने जो संसद में इस कानून का विरोध किया उस वजह से औरतों में नाराजगी है और इसलिए ये प्रदर्शन हो रहा है। इस दौरान महिलाएं, 'हम भारत की नारी हैं, हम फूल नहीं चिंगारी हैं!' का नारा भी लगा रही थीं।

प्रदर्शन में एक लाख महिलाओं के शामिल होने का दावा

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दावा किया कि इस आक्रोश मार्च में पटना और आसपास के इलाकों से एक लाख से अधिक महिलाएं शामिल हुई हैं। उन्होंने कहा कि देश की बहनों को जैसे अपमानित किया गया। जिन नेताओं ने महिला आरक्षण बिल का विरोध किया है। उनके घर की महिलाएं भी आज दुखी हैं। यह विरोध सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगा जिलों और प्रखंडों तक जाएगा।

सड़कों पर महिलाओं की भारी भीड़ के कारण राजधानी की रफ्तार थम गई। गांधी मैदान के आसपास की सड़कों पर यातायात पूरी तरह रोक दिया गया। सुरक्षा के मद्देनजर मोना और रिजेंट सिनेमा हॉल के साथ-साथ मौर्य लोक कॉम्प्लेक्स की कई दुकानों के शटर गिर गए। इतना ही नहीं घंटों तक लगे जाम के कारण आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

राहुल, तेजस्वी और ममता निशाने पर

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेताओं के बड़े-बड़े पोस्टर ले रखे थे, जिन पर काली स्याही और विरोध के नारे लिखे थे। पोस्टरों में राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी और असदुद्दीन ओवैसी को 'नारी शक्ति का दुश्मन' बताया गया। इसके साथ ही 'नारी शक्ति की झूठी कहानी, कांग्रेस की आदत पुरानी' जैसे नारे भी लगाए गए।

श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह भी पहुंची

इस मार्च में एनडीए की दिग्गज महिला नेत्रियों ने हिस्सा लिया। पूर्व मंत्री श्रेयसी सिंह, लेसी सिंह और पटना की मेयर सीता साहू ने नेतृत्व करते हुए कहा कि विपक्ष ने संसद में बिल को गिराकर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। मेयर सीता साहू ने कहा, 'राजद और कांग्रेस का मेल केवल कुर्सी के लिए है, ये लोग कभी नहीं चाहते कि महिलाएं सदन में बैठकर फैसले लें।'

वहीं, जमुई से भाजपा विधायक श्रेयसी सिंह ने कहा, ' विपक्ष के नेताओं ने महिलाओं का अपमानित करने का काम किया है। राजद-कांग्रेस जैसी पार्टियां केवल मंच पर नारेबाजी करते हैं। लेकिन अगर महिला अपने घर से निकल कर राजनैतिक प्रतिनिधित्व कर्ता बने ये आप नहीं चाहते। ये लोग नहीं चाहते ही महिला की भागीदारी बढ़े।'

क्या है विवाद की जड़?

हाल ही में लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक (महिला आरक्षण) पेश किया गया था, जिसे पारित होने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। सदन में पक्ष में 278 और विपक्ष में 211 वोट पड़े, जिसके कारण बिल गिर गया। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष ने डिलिमिटेशन (परिसीमन) के नाम पर बहानेबाजी की और ऐतिहासिक सुधार को रोक दिया।