
निलंबित SDPO गौतम कुमार (फाइल फोटो)
बिहार के किशनगंज के निलंबित SDPO गौतम कुमार के खिलाफ इकोनॉमिक ऑफेंस यूनिट (EOU) की चल रही जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, उनके गलत कामों के बारे में नई-नई बातें सामने आ रही हैं। जांच में न केवल उनकी करोड़ों की अवैध संपत्ति का पता चल रहा है, बल्कि उनकी अय्याशी की कहानियां भी सामने आ रही हैं। जहां शुरुआती जांच में केवल एक गर्लफ्रेंड होने का पता चला था, वहीं अब जांच से पता चला है कि उनकी पांच महिला साथी थीं। आरोप है कि गौतम ने तस्करों और भू-माफियाओं से वसूली गई करोड़ों रुपये की रकम इन महिला साथियों को ऐशो-आराम और महंगे तोहफे देने पर लुटा दी।
गौतम कुमार अकेले ही इस अवैध कमाई के रैकेट को नहीं चला रहा था। उसके साथ कई अन्य लोग भी शामिल थे, लेकिन मुख्य रूप से दो लोगों के नाम सामने आए हैं। EOU की जांच में पता चला है कि किशनगंज के टाउन पुलिस स्टेशन के सस्पेंडेड स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) अभिषेक रंजन और गौतम के बीच गहरी मिलीभगत थी। अभिषेक ने सिलीगुड़ी के बागडोगरा में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की जमीन खरीदी, जिसे उसने अपनी पत्नी और साले के नाम पर रजिस्टर्ड करवाया, जिसके लिए 84 लाख रुपये नकद भुगतान किया गया।
अभिषेक के अलावा बंगाल सीमा पर रामपुर चेक-पोस्ट के पास स्थित एक होटल इस सिंडिकेट का मुख्य अड्डा बन गया था। यहीं पर तस्करों से वसूली गई रंगदारी की रकम ली जाती थी और गौतम अपनी आलीशान पार्टियां और मौज-मस्ती करता था। EOU अब होटल संचालक से भी पूछताछ करने की तैयारी में है।
गौतम कुमार का पतन तब शुरू हुआ जब SSB (सशस्त्र सीमा बल) और IB (इंटेलिजेंस ब्यूरो) ने केंद्र सरकार को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि किशनगंज जैसे संवेदनशील सीमावर्ती इलाके (जो नेपाल, बांग्लादेश और बंगाल की सीमाओं से जुड़ा है) में गौतम के कार्यकाल के दौरान, शराब, पशुधन, नकली नोट और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई लगभग न के बराबर थी। जब पुलिस मुख्यालय ने इस जीरो एक्शन के रिकॉर्ड से जुड़ी फाइलों की जांच की, तो गौतम उनकी नजर में आ गया। ओसके बाद EOU ने 31 मार्च को उसके ठिकानों पर पहली बार छापेमारी की।
गौतम और अभिषेक के मोबाइल फोन से मिले डेटा ने पुलिस विभाग के कई बड़े अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। EOU अब किशनगंज और पूर्णिया में तैनात चार अन्य SDPO (सब-डिविजनल पुलिस ऑफिसर) के रिकॉर्ड और पृष्ठभूमि की गहन जांच कर रही है। व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि SP (पुलिस अधीक्षक) रैंक के कई अधिकारी, जो उस दौरान इस क्षेत्र में तैनात थे, वे भी जल्द ही इस जांच के दायरे में आ सकते हैं।
Updated on:
20 Apr 2026 09:56 am
Published on:
20 Apr 2026 09:55 am
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