
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार
निशांत कुमार के जदयू में एंट्री के साथ ही उनकी एक टीम भी तैयार की गई है, जिसमें युवाओं को ज्यादा मौका दिया गया है। इस टीम में छात्र राजनीति और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े चेहरों को प्राथमिकता दी गई है। जदयू सूत्रों के मुताबिक, निशांत कुमार के साथ युवा नेताओं का एक कोर ग्रुप तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी के नेतृत्व को मजबूत आधार देना और संगठन को युवाओं के जरिए और सक्रिय बनाना है।
सूत्रों के मुताबिक निशांत कुमार की टीम में सात प्रमुख नाम शामिल किए गए हैं। इनमें ज्यादातर युवा विधायक हैं, जो निशांत कुमार के साथ मिलकर काम करेंगे। माना जा रहा है कि निशांत कुमार का यह ‘कोर ग्रुप’ बदलती सियासत में नई धुरी बन सकता है। ‘टीम निशांत’ की पार्टी और सरकार में क्या भूमिका होगी, इसे लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार इस टीम में इस्लामपुर के विधायक रूहेल रंजन, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह के बेटे शुभानंद मुकेश, जदयू नेता दिनेश कुमार सिंह, सांसद वीणा देवी की बेटी और विधायक कोमल सिंह, बाहुबली नेता आनंद मोहन के बेटे और विधायक चेतन आनंद, नीतीश कुमार के भांजे मनीष कुमार और विधायक अतिरेक कुमार को शामिल किया गया है।
नीतीश कुमार के साथ लंबे समय तक काम करने वाले कुछ वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश में बनने वाली नई सरकार में अपनी भूमिका को लेकर पार्टी नेतृत्व को अपनी राय से अवगत करा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इन नेताओं ने सरकार में शामिल होने के बजाय संगठन में काम करने की इच्छा जताई है।
ऐसी स्थिति में ‘टीम निशांत’ से जुड़े कुछ नेताओं को नई सरकार में मौका मिल सकता है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के भरोसेमंद नेताओं में शामिल बिजेंद्र यादव, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेताओं ने संगठन में काम करने की इच्छा व्यक्त की है।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश की नई सरकार में जदयू कोटे से करीब 15 मंत्री बनाए जाने की संभावना है, जिनमें युवाओं को अधिक अवसर मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार में यदि मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाता है तो ऐसी स्थिति में निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। उनके साथ युवाओं की एक टीम को भी नई सरकार में मंत्री पद मिल सकता है।
दरअसल, पार्टी में किए जा रहे कई बदलावों का केंद्र निशांत कुमार को ही माना जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के दौरान उनके सामने कई चुनौतियां भी होंगी।
नेताओं का कहना है कि निशांत कुमार को एक ओर जहां पार्टी संगठन को मजबूत करना होगा, वहीं बिहार की जटिल सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों से निपटने की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर होगी। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में सक्रिय अन्य युवा नेताओं के साथ राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना भी करना पड़ेगा।
Published on:
13 Mar 2026 11:46 am
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