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‘ज्यादा देर बात नहीं कर सकता…’ मौत से पहले बिहार के इंजीनियर का आखिरी कॉल; इराक में तेल टैंकर पर हुए हमले में गंवाई जान

Iran-US Israel War: ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच जारी जंग की आग अब भारत के घरों तक भी पहुंच गई है। भागलपुर के देवनंदन की इराक के बसरा बंदरगाह पर हुए एक हमले में जान चली गई। अपनी मृत्यु से कुछ ही समय पहले, उन्होंने फोन पर अपने परिवार से कुछ देर बाद बात करने को कहा था। 

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पटना

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Anand Shekhar

Mar 13, 2026

देवनंदन, Iran-US Israel War, bihar news

देवनंदन की फ़ाइल फोटो और जहाज की AI जेनरेटेड तस्वीर


Iran-US Israel War:ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग के बीच भारत और खासकर बिहार के लिए बेहद दुखद खबर सामने आई है। भागलपुर जिले के रानिबिमिया गांव के निवासी और मरीन इंजीनियर देवनंदन प्रसाद सिंह (50) की, इराक के बसरा बंदरगाह के पास एक जहाज पर हुए हमले में जान चली गई। देवनंदन प्रसाद सिंह जहाज पर एडिशनल चीफ इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे और एक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनी द्वारा संचालित तेल टैंकर पर ड्यूटी पर थे। घटना की खबर मिलते ही, उनके परिवार और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।

देवनंदन का आखिरी कॉल

देवनंदन के छोटे भाई, कृष्ण नंदन प्रसाद सिंह ने बताया कि देवानंदन प्रसाद सिंह ने इस घटना से कुछ ही समय पहले अपने परिवार से बात की थी। देवनंदन ने फोन पर बातचीत को बहुत छोटा रखा और कहा, 'मैं अभी समुद्र में हूं और ड्यूटी पर तैनात हूं, इसलिए ज्यादा देर बात नहीं कर सकता। बाद में कॉल करूंगा।' इसके बाद उनका फोन बंद हो गया और परिवार उनसे दोबारा संपर्क नहीं कर पाया। किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी बातचीत होगी। अगले दिन, जब शिपिंग कंपनी के अधिकारियों ने फोन करके उन्हें इस दुखद घटना की जानकारी दी, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।

बसरा बंदरगाह के पास हमला

भारत सरकार के डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) के अनुसार, यह हमला बुधवार रात (11 मार्च) को लगभग 9:00 बजे खोर अल ज़ुबैर बंदरगाह के पास हुआ था। देवनंदन प्रसाद सिंह अमेरिका के मालिकाना हक वाले मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले तेल टैंकर MT Safesea Vishnu पर कार्यरत थे।

जब जहाज़ पर 48,000 मीट्रिक टन नैफ्था (एक ज्वलनशील तेल) लोड किया जा रहा था, तभी एक बिना ड्राइवर वाली सफेद रंग की स्पीडबोट जहाज के दाईं ओर से टकरा गई। स्पीडबोट पर भारी मात्रा में विस्फोटक लदा हुआ था। टक्कर के बाद, जहाज में एक जबरदस्त धमाका हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि जहाज पर भीषण आग लग गई।

जान बचाने के लिए समुद्र में कूदे क्रू मेंबर

आग लगने के तुरंत बाद जहाज पर अफरा-तफरी मच गई। जहाज पर मौजूद कई क्रू सदस्यों ने अपनी जान बचाने की कोशिश में समुद्र में छलांग लगा दी। इराकी कोस्ट गार्ड ने एक बचाव अभियान शुरू किया और कुल 28 क्रू सदस्यों को सफलतापूर्वक बचा लिया। इनमें 16 भारतीय नागरिक और 12 फिलीपींस के नागरिक थे। हालांकि, देवनंदन प्रसाद सिंह इस दुर्घटना में जीवित नहीं बच पाए। स्थानीय अधिकारियों ने उनके शव को अपने कब्जे में ले लिया है और उसे हिंदुस्तान भेजने के लिए जरूरी प्रक्रियाएं शुरू कर दी हैं।

BIT सिंदरी के छात्र थे देवनंदन

बिहार के भागलपुर जिले के रानिबिमिया गांव के मूल निवासी, देवनंदन प्रसाद सिंह अपनी पढ़ाई-लिखाई में असाधारण रूप से होनहार थे। उन्होंने धनबाद के प्रतिष्ठित BIT सिंदरी से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी डिग्री पूरी की। वो यहां 1990–94 बैच के छात्र थे। उनके सहपाठी उन्हें प्यार से 'देव' कहकर बुलाते थे। उनके साथियों के अनुसार, वह न केवल एक होनहार इंजीनियर थे, बल्कि एक बेहद मिलनसार और दयालु इंसान भी थे।

परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा

देवनंदन प्रसाद सिंह के निधन की खबर मिलते ही, उनके गांव में शोक की लहर दौड़ गई। उनके परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। देवनंदन का अपना परिवार मुंबई के कांदिवली में रहता था, जबकि उनका पुश्तैनी गांव भागलपुर में है। उनके परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं। उनके भाई और अन्य रिश्तेदार उनके शव को वापस उनके वतन लाने के लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने दिल्ली रवाना हो गए हैं। गांव वालों का कहना है कि उन्होंने एक होनहार बेटे को खो दिया है, जो हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहता था।